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सोमवार की सुबह दुनिया भर के निवेशकों के लिए किसी झटके से कम नहीं थी। कुछ दिन पहले तक जिन बाजारों में रिकॉर्ड तेजी दिखाई दे रही थी, वहीं अचानक भारी बिकवाली शुरू हो गई। एशिया से अमेरिका तक निवेशकों की संपत्ति तेजी से घटने लगी और कुछ ही घंटों में लाखों करोड़ रुपये बाजार से साफ हो गए। सबसे बड़ा झटका दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार को लगा, जहां प्रमुख सूचकांक में लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालात इतने खराब हो गए कि बाजार नियामकों को कुछ समय के लिए कारोबार रोकना पड़ा। इस बीच अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शेयरों में बनी तेज़ी का दौर कमजोर पड़ने लगा है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने बनाई थी बाजार की नई कहानी
पिछले दो वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता दुनिया के शेयर बाजारों की सबसे बड़ी निवेश थीम बनकर उभरी। निवेशकों ने उन कंपनियों में जमकर पैसा लगाया जो इस तकनीक से जुड़ी थीं। विशेष रूप से चिप निर्माण और डाटा केंद्रों से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई। दक्षिण कोरिया की सैमसंग और एसके हाइनिक्स इस दौड़ की सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरीं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सर्वरों में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग ने इन कंपनियों के कारोबार और शेयर कीमतों दोनों को नई ऊंचाई पर पहुंचाया। इसी तेजी के दम पर दक्षिण कोरिया का बाजार इस वर्ष दुनिया के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल हो गया।
अचानक क्यों टूट गया बाजार?
बाजार में गिरावट की शुरुआत तब हुई जब निवेशकों को लगने लगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में भविष्य की उम्मीदें वास्तविक कमाई से कहीं ज्यादा आगे निकल गई हैं। अमेरिका की कुछ प्रमुख चिप कंपनियों के नतीजों और भविष्य के अनुमान ने बाजार की उम्मीदों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं किया। इसके बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। जब तेजी के दौरान बने ऊंचे मूल्यांकन पर सवाल उठने लगे तो बिकवाली का दबाव तेजी से बढ़ गया। यही डर धीरे-धीरे अमेरिका से एशियाई बाजारों तक फैल गया।
दक्षिण कोरिया में क्यों आई सबसे बड़ी गिरावट?
दक्षिण कोरिया का बाजार कुछ चुनिंदा तकनीकी कंपनियों पर काफी हद तक निर्भर था। सैमसंग और एसके हाइनिक्स का प्रभाव इतना बड़ा है कि दोनों कंपनियां बाजार के कुल मूल्य का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करती हैं। जब इन दोनों शेयरों में बिकवाली शुरू हुई तो पूरे बाजार पर दबाव बढ़ गया। निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की और देखते ही देखते प्रमुख सूचकांक लगभग 9 प्रतिशत तक टूट गया। गिरावट इतनी तेज थी कि निवेशकों की घबराहट को नियंत्रित करने के लिए करीब 20 मिनट तक कारोबार रोकना पड़ा। यह कदम आमतौर पर तभी उठाया जाता है जब बाजार में असामान्य उतार-चढ़ाव दिखाई देता है।
अमेरिकी बाजार में भी मचा हाहाकार
दक्षिण कोरिया ही नहीं, अमेरिका के शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। तकनीकी कंपनियों पर आधारित प्रमुख सूचकांक में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और चिप निर्माण से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बड़ी बिकवाली हुई। एनवीडिया, माइक्रोन, मार्वेल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज और ब्रॉडकॉम जैसी कंपनियों के शेयर एक ही दिन में 6 प्रतिशत से 17 प्रतिशत तक टूट गए। इस गिरावट के कारण अमेरिकी बाजार से लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 124 लाख करोड़ रुपये की बाजार पूंजीकरण कम हो गई। यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावटों में से एक है।
गिरावट के पीछे सिर्फ एआई नहीं, ये 4 कारण भी जिम्मेदार
बाजार की कमजोरी के पीछे केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर चिंता नहीं थी। पहला कारण अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़े रहे। मई में 1.72 लाख नई नौकरियां जुड़ीं, जो अनुमान से कहीं अधिक थीं। दूसरा कारण ब्याज दरों को लेकर चिंता है। मजबूत अर्थव्यवस्था का मतलब यह है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक जल्द ब्याज दरों में कटौती नहीं कर सकता। तीसरा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। चौथा कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई और वैश्विक आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हो जाती है।
भारतीय बाजार भी दबाव में आए
वैश्विक बाजारों में आई कमजोरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में लगभग 800 अंक तक फिसल गया जबकि निफ्टी 23,150 के नीचे पहुंच गया। बाजार पूंजीकरण में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में बिकवाली देखने को मिली। वाहन, धातु, बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी और रियल एस्टेट शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की कमजोरी को बढ़ाया। जून के शुरुआती दिनों में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 31,000 करोड़ रुपये से अधिक निकाल चुके हैं।
देश की दिग्गज कंपनियों को कितना नुकसान हुआ?
पिछले सप्ताह देश की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 7 के बाजार मूल्य में कुल 1.25 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई। सबसे बड़ा नुकसान रिलायंस इंडस्ट्रीज को हुआ, जिसका बाजार मूल्य लगभग 39,700 करोड़ रुपये घट गया। इसके अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, भारती एयरटेल, लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाजार मूल्य में भी बड़ी कमी आई। हालांकि एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक इस दौरान मजबूती दिखाने में सफल रहे।
निवेशकों को अब किन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए?
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तीन प्रमुख कारकों से तय होगी। पहला, कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र की कंपनियों की कमाई और मांग के आंकड़े। दूसरा, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर अगली रणनीति। तीसरा, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों की चाल। यदि इन मोर्चों पर स्थिति स्थिर होती है तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन अनिश्चितता बढ़ने पर दबाव कुछ समय तक जारी रह सकता है।
निष्कर्ष:
बाजार में आई यह बड़ी गिरावट निवेशकों को एक महत्वपूर्ण सीख देती है कि तेजी का दौर हमेशा बिना रुकावट आगे नहीं बढ़ता। कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने पिछले दो वर्षों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं, लेकिन हर तेजी के बाद मूल्यांकन और वास्तविक कमाई के बीच संतुलन की परीक्षा भी होती है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बुलबुला पूरी तरह फूट गया है। हालांकि यह जरूर स्पष्ट हो गया है कि बाजार अब केवल उम्मीदों पर नहीं, बल्कि वास्तविक प्रदर्शन और कमाई पर ध्यान देगा। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह घबराने का समय नहीं बल्कि गुणवत्ता वाली कंपनियों पर नजर रखने का अवसर हो सकता है। इतिहास बताता है कि बाजार की बड़ी गिरावटें अक्सर भविष्य के बड़े अवसरों की शुरुआत भी बनती हैं।