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भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह उतार-चढ़ाव काफी तेज रहा, लेकिन इसके बावजूद देश की सबसे बड़ी कंपनियों ने निवेशकों को राहत दी। बाजार पूंजीकरण के आधार पर देश की शीर्ष 10 कंपनियों में से 6 कंपनियों की संयुक्त बाजार वैल्यू में ₹74,111 करोड़ से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान रिलायंस इंडस्ट्रीज का रहा, जिसने अकेले लगभग ₹24,700 करोड़ की वैल्यू जोड़ी। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता, रुपये की कमजोरी, ब्याज दरों को लेकर चिंता और क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारतीय बाजारों ने मजबूती दिखाई। यही वजह रही कि निवेशकों का रुझान फिर से बड़ी और मजबूत कंपनियों की ओर बढ़ता दिखाई दिया। खासतौर पर बैंकिंग, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों में खरीदारी देखने को मिली।
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने दिखाई हिम्मत
पिछले सप्ताह बाजार का माहौल पूरी तरह स्थिर नहीं था। कारोबार के दौरान कई बार तेज गिरावट और रिकवरी देखने को मिली। इसके बावजूद बीएसई सेंसेक्स सप्ताह के अंत तक बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। सेंसेक्स में पूरे सप्ताह के दौरान लगभग 177 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। वहीं कुछ रिपोर्टों के अनुसार साप्ताहिक आधार पर सूचकांक में 1,149 अंकों तक की मजबूती देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों ने कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा बनाए रखा। रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ विश्लेषक अजीत मिश्रा के अनुसार, पूरे सप्ताह बाजार सीमित दायरे में रहा, लेकिन मजबूत कंपनियों में निवेशकों की खरीदारी जारी रही। रुपये की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण अस्थिरता बनी रही, फिर भी बड़े शेयरों ने बाजार को संभाले रखा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने दिखाई सबसे बड़ी ताकत
बीते सप्ताह सबसे ज्यादा चर्चा रिलायंस इंडस्ट्रीज की रही। कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹24,696 करोड़ बढ़कर ₹18.33 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इसके साथ ही रिलायंस देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी के ऊर्जा, दूरसंचार और खुदरा कारोबार में लगातार विस्तार से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित विशाल कृत्रिम बुद्धिमत्ता डेटा सेंटर परियोजना को भी बाजार ने सकारात्मक संकेत के रूप में देखा। रिलायंस का बाजार पूंजीकरण बढ़ना केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि निवेशक अभी भी लंबी अवधि के लिए मजबूत और विविध कारोबार वाली कंपनियों पर भरोसा कर रहे हैं।
टीसीएस और आईसीआईसीआई बैंक ने भी बढ़ाई निवेशकों की संपत्ति
रिलायंस के बाद सबसे बड़ा फायदा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और आईसीआईसीआई बैंक को हुआ। टीसीएस का बाजार मूल्यांकन ₹19,338 करोड़ बढ़कर ₹8.38 लाख करोड़ पहुंच गया। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सुधार की उम्मीदों और विदेशी मांग में स्थिरता ने निवेशकों को उत्साहित किया। वहीं आईसीआईसीआई बैंक का बाजार पूंजीकरण ₹14,515 करोड़ बढ़कर ₹9.06 लाख करोड़ हो गया। मजबूत ऋण वृद्धि, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और लगातार अच्छे वित्तीय प्रदर्शन ने बैंकिंग शेयरों में भरोसा बढ़ाया। एलआईसी, बजाज फाइनेंस और लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियों में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। एलआईसी की वैल्यू ₹9,076 करोड़ बढ़ी, जबकि बजाज फाइनेंस और एलएंडटी ने भी हजारों करोड़ रुपये जोड़े।
किन कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ?
जहां कुछ कंपनियों ने निवेशकों को फायदा पहुंचाया, वहीं कुछ बड़े नाम दबाव में दिखाई दिए। सबसे ज्यादा नुकसान भारती एयरटेल को हुआ। कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹20,229 करोड़ घटकर ₹11.40 लाख करोड़ रह गया। हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यू भी ₹16,212 करोड़ कम हुई। उपभोक्ता मांग में नरमी और महंगाई का असर इस क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का बाजार पूंजीकरण ₹12,784 करोड़ घटा, जबकि एचडीएफसी बैंक की वैल्यू में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों ने हाल की तेजी के बाद कुछ शेयरों में मुनाफावसूली की। यही कारण है कि चुनिंदा कंपनियों में दबाव देखने को मिला।
आखिर बाजार पूंजीकरण होता क्या है?
बाजार पूंजीकरण किसी भी कंपनी की कुल बाजार वैल्यू को दर्शाता है। इसे कंपनी के कुल शेयरों की संख्या को मौजूदा शेयर कीमत से गुणा करके निकाला जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कंपनी के 1 करोड़ शेयर हैं और एक शेयर की कीमत ₹100 है, तो कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹100 करोड़ होगा। जब किसी कंपनी के शेयरों की कीमत बढ़ती है, तो उसका बाजार पूंजीकरण भी बढ़ता है। इसी तरह शेयर गिरने पर बाजार मूल्यांकन घट जाता है। बाजार पूंजीकरण बढ़ने का मतलब यह भी होता है कि निवेशकों की कुल संपत्ति में वृद्धि हुई है। बड़ी बाजार वैल्यू वाली कंपनियों को फंड जुटाने, विस्तार करने और नए कारोबार में निवेश करने में भी आसानी होती है।
बाजार में तेजी के पीछे कौन से बड़े कारण रहे? विशेषज्ञों के अनुसार इस तेजी के पीछे कई अहम वजहें रहीं। पहला कारण था घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों ने लगातार खरीदारी जारी रखी। दूसरा कारण बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजे रहे। खासकर बैंकिंग, ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। तीसरा बड़ा कारण यह रहा कि निवेशकों को भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक वृद्धि पर भरोसा बना हुआ है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर बनी हुई है।
आने वाले समय में निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले हफ्तों में बाजार की दिशा कई बड़े कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें वैश्विक ब्याज दरें, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और रुपये की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके अलावा कंपनियों की भविष्य की कारोबारी योजनाएं और आर्थिक सुधारों से जुड़े सरकारी कदम भी बाजार की चाल तय करेंगे। बड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी फिलहाल बनी हुई है, लेकिन बाजार में अस्थिरता भी बनी रह सकती है। इसलिए निवेशकों को केवल तेजी देखकर निवेश करने के बजाय मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।
निष्कर्ष:
बीते सप्ताह का बाजार एक बार फिर यह दिखाता है कि अनिश्चित माहौल में भी मजबूत कंपनियां निवेशकों का भरोसा बनाए रखती हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस और आईसीआईसीआई बैंक जैसी कंपनियों ने यह साबित किया कि मजबूत कारोबार मॉडल और लगातार विस्तार निवेशकों की संपत्ति बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है, लेकिन बड़ी और मजबूत कंपनियों में निवेशकों का भरोसा फिलहाल कायम दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यही कंपनियां भारतीय बाजार की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।