ट्रंप टैरिफ के बावजूद चीन का रिकॉर्ड कारनामा

ट्रंप टैरिफ के बावजूद चीन का रिकॉर्ड कारनामा: 2025 में 1.2 ट्रिलियन डॉलर का ऐतिहासिक ट्रेड सरप्लस

साल 2025 में वैश्विक अर्थव्यवस्था जहां अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति और व्यापार तनावों से जूझती रही, वहीं चीन ने एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। चीन ने 2025 में करीब 1.19–1.2 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) दर्ज किया, जो किसी भी देश द्वारा अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक ट्रेड सरप्लस है। यह पहली बार है जब चीन का पूर्ण-वर्षीय व्यापार अधिशेष 1 ट्रिलियन डॉलर के पार गया है, जिसने 2024 के 993 अरब डॉलर के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। रिकॉर्ड आंकड़े और निर्यात की मजबूती चीन के सीमा शुल्क विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में चीन के मासिक व्यापार अधिशेष सात बार 100 अरब डॉलर से अधिक रहा। दिसंबर 2025 में ही चीन का मासिक ट्रेड सरप्लस करीब 114 अरब डॉलर रहा, जो बीते छह महीनों में सबसे अधिक था। दिसंबर में निर्यात साल-दर-साल 6.6% बढ़ा, जो तीन महीनों में सबसे तेज वृद्धि थी और बाजार अनुमानों से कहीं अधिक रही। हालांकि अमेरिका के साथ चीन का व्यापार कमजोर हुआ, लेकिन इस गिरावट की भरपाई चीन ने दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोप जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाकर कर ली। इससे साफ हो गया कि अमेरिकी बाजार पर चीन की निर्भरता पहले की तुलना में काफी कम हो चुकी है। ट्रंप टैरिफ का सीमित असर डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल 2025 में 90 से अधिक देशों पर व्यापक टैरिफ लगाए थे, जिनमें सबसे कठोर शुल्क चीन के लिए थे। उस समय विशेषज्ञों ने इसे चीन की अमेरिकी बाजार पर निर्भरता की बड़ी परीक्षा माना था। हालांकि, आंकड़ों से पता चलता है कि ट्रंप की टैरिफ नीति चीन की कुल निर्यात शक्ति को कमजोर करने में नाकाम रही। अमेरिका को जाने वाले चीनी निर्यात में गिरावट जरूर आई, लेकिन चीन के निर्यातकों ने तेजी से नए बाजार तलाश लिए। यह रणनीतिक विविधीकरण चीन के लिए फायदेमंद साबित हुआ। किन कारणों से बढ़ा ट्रेड सरप्लस? चीन के रिकॉर्ड ट्रेड सरप्लस के पीछे कई संरचनात्मक कारण हैं: 1. विनिर्माण में दबदबा:चीन ने बीते वर्षों में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और चिप्स जैसे क्षेत्रों में विशाल उत्पादन क्षमता विकसित की है। 2025 में चीन के वाहन निर्यात में 19.4% की वृद्धि हुई, जबकि शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात करीब 49% उछल गया। 2. कमजोर घरेलू मांग: चीन की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संपत्ति (रियल एस्टेट) संकट और बढ़ते कर्ज के दबाव में है। इसके कारण उपभोक्ता खर्च और निवेश दोनों कमजोर रहे। नतीजतन, आयात में केवल 0.5% की मामूली बढ़ोतरी हुई, जिससे व्यापार अधिशेष और बढ़ गया। 3. मुद्रा का असर: युआन की कमजोरी ने चीनी निर्यात को और प्रतिस्पर्धी बना दिया। डॉलर के मुकाबले भले ही युआन थोड़ा मजबूत हुआ हो, लेकिन यूरो के मुकाबले इसमें 7% से अधिक की गिरावट आई। घरेलू स्तर पर कम महंगाई और पश्चिमी देशों में ऊंची महंगाई ने भी चीनी उत्पादों को सस्ता और आकर्षक बनाया। चीन सरकार और विशेषज्ञों की राय चीन के सीमा शुल्क विभाग के उप निदेशक वांग जून ने इन आंकड़ों को “असाधारण और कठिन परिस्थितियों में हासिल किया गया” बताया। उन्होंने कहा कि 2025 में चीन का कुल व्यापार 45 ट्रिलियन युआन ($6.4 ट्रिलियन) को पार कर गया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। हालांकि, विशेषज्ञ इसे “मिश्रित वरदान” मानते हैं। हिनरिच फाउंडेशन की व्यापार नीति विश्लेषक डेबोरा एल्म्स के अनुसार, चीन को इससे रोजगार और बिक्री का लाभ मिला है, लेकिन साथ ही उसके उत्पादों पर विदेशी बाजारों में कड़ी जांच और संरक्षणवादी नीतियों का खतरा भी बढ़ेगा। वैश्विक चिंता और आगे की राह चीन का ट्रेड सरप्लस अब उसकी कुल जीडीपी के 10% से भी अधिक हो चुका है। इससे कई देशों में चिंता बढ़ रही है कि सस्ते चीनी उत्पाद उनके घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यूरोप, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों ने पहले ही सीमित टैरिफ और प्रतिबंध लगाए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी चेतावनी दी है कि चीन को निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता कम कर घरेलू खपत को बढ़ावा देना चाहिए, वरना वैश्विक व्यापार तनाव और गहरे हो सकते हैं। निष्कर्ष 2025 का रिकॉर्ड ट्रेड सरप्लस यह दिखाता है कि ट्रंप टैरिफ और वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद चीन की निर्यात मशीनरी बेहद मजबूत बनी हुई है। हालांकि यह चीन के लिए आर्थिक ताकत का प्रतीक है, लेकिन साथ ही यह आने वाले वर्षों में नए व्यापार संघर्षों और राजनीतिक दबावों का संकेत भी देता है। 2026 में यह देखना दिलचस्प होगा कि चीन इस संतुलन को कैसे साधता है-निर्यात की रफ्तार बनाए रखते हुए घरेलू मांग को कितना मजबूत कर पाता है।