चीन की सप्लाई, वेदांता की ब्लॉक डील और मुनाफावसूली 

जानिए पूरी कहानी

मंगलवार का कारोबारी सत्र मेटल शेयरों के निवेशकों के लिए किसी झटके से कम नहीं रहा। सुबह बाजार खुलते ही मेटल सेक्टर में जोरदार बिकवाली शुरू हो गई। NALCO, Vedanta, Hindalco, Hindustan Zinc, Tata Steel, SAIL और JSW Steel जैसे बड़े शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। सबसे बड़ा झटका वेदांता के निवेशकों को लगा, जहां कुछ ही मिनटों में शेयर करीब 9% तक टूट गया। यह खबर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं है। मेटल सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, निर्माण और ऊर्जा उद्योगों की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में इस सेक्टर में बड़ी गिरावट निवेशकों के साथ-साथ उद्योग जगत के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देती है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि मजबूत मानी जाने वाली मेटल कंपनियों के शेयरों में अचानक बिकवाली की लहर दौड़ गई?
मेटल इंडेक्स में बड़ी गिरावट, पूरे सेक्टर पर दबाव
मंगलवार दोपहर तक निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 3% से अधिक टूट चुका था। NALCO, Hindustan Zinc, Hindalco और Vedanta सबसे बड़े नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे। NALCO का शेयर करीब 4.5% गिरकर 361 रुपये के आसपास पहुंच गया। Hindalco में लगभग 3% और Hindustan Zinc में भी करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं Tata Steel, SAIL और Jindal Steel जैसे स्टील शेयरों में 1% से 3% तक कमजोरी देखने को मिली। यह गिरावट केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे मेटल सेक्टर में दबाव दिखाई दिया।
एल्युमिनियम की कीमतों ने बिगाड़ा खेल
विश्लेषकों के अनुसार गिरावट की सबसे बड़ी वजह एल्युमिनियम की वैश्विक कीमतों में आई कमजोरी है। हाल के दिनों में चीन से एल्युमिनियम निर्यात बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। इसके साथ ही घरेलू और वैश्विक उत्पादन भी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। जब किसी वस्तु की आपूर्ति बढ़ती है और मांग उतनी तेजी से नहीं बढ़ती, तो कीमतों पर दबाव आना स्वाभाविक होता है। निवेशकों को डर है कि यदि एल्युमिनियम की कीमतें और नीचे जाती हैं, तो NALCO और Hindalco जैसी कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने पहले मुनाफावसूली करना बेहतर समझा।
चीन और वैश्विक बाजार का कितना असर?
मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने और सप्लाई सामान्य होने की उम्मीदों ने भी धातुओं की कीमतों पर दबाव बनाया है। लंदन मेटल एक्सचेंज में एल्युमिनियम तीन महीने के निचले स्तर तक फिसल गया। कॉपर सहित अन्य धातुओं में भी कमजोरी देखने को मिली। लेकिन पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार चीन के बाहर एल्युमिनियम की सप्लाई अभी भी बहुत तेजी से नहीं बढ़ रही है। इसका मतलब यह है कि लंबी अवधि में मांग और आपूर्ति का संतुलन पूरी तरह नहीं बिगड़ा है।
Vedanta में सबसे ज्यादा हड़कंप क्यों मचा?
दिन की सबसे बड़ी खबर वेदांता रही। कंपनी का शेयर करीब 9% तक टूट गया। इसके पीछे मुख्य वजह प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी बिक्री की खबर रही। रिपोर्ट्स के अनुसार प्रमोटर समूह की कंपनी ट्विन स्टार होल्डिंग्स ने ब्लॉक डील के जरिए करीब 1.7% हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई। बाजार में लगभग 7.3 करोड़ से 7.6 करोड़ शेयरों का सौदा हुआ, जिसकी कुल कीमत करीब ₹2,200 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। जब बाजार में इतनी बड़ी मात्रा में शेयर एक साथ बिकने की खबर आती है, तो निवेशकों को डर रहता है कि सप्लाई बढ़ने से कीमत और गिर सकती है। यही वजह रही कि वेदांता में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली।
केवल गिरावट नहीं, मुनाफावसूली भी एक कारण
लेकिन सवाल यह है कि क्या मेटल सेक्टर की कहानी अचानक खराब हो गई है? विशेषज्ञ ऐसा नहीं मानते। निफ्टी मेटल इंडेक्स इस वर्ष जून से पहले 20% से अधिक चढ़ चुका था। इसके मुकाबले व्यापक बाजार अपेक्षाकृत कमजोर रहा था। ऐसे में कई निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफा बुक करना शुरू किया। बाजार में इसे सामान्य करेक्शन माना जा रहा है। यानी मौजूदा गिरावट का एक बड़ा हिस्सा मुनाफावसूली से भी जुड़ा हुआ है।
स्टील कंपनियों पर क्या असर पड़ा?
एल्युमिनियम कंपनियों के साथ-साथ स्टील कंपनियों में भी दबाव देखने को मिला। हालांकि कई ब्रोकरेज हाउस अब भी भारतीय स्टील उद्योग को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। उनका मानना है कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक विकास के कारण स्टील की मांग मजबूत बनी हुई है। इसी वजह से कई संस्थानों ने Tata Steel, JSW Steel और Jindal Steel पर अपनी सकारात्मक राय बरकरार रखी है। विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि मेटल इंडेक्स फिलहाल एक समेकन चरण से गुजर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार NALCO के लिए ₹345-350 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र माना जा रहा है। वहीं Hindalco के लिए ₹965-995 और Vedanta के लिए ₹275 के आसपास प्रमुख समर्थन दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि ये स्तर बने रहते हैं तो आने वाले महीनों में फिर से खरीदारी लौट सकती है।
निवेशकों के लिए क्या हैं अवसर और जोखिम?
मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा जोखिम वैश्विक धातु कीमतों में और कमजोरी है। चीन की सप्लाई, वैश्विक आर्थिक मंदी और अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़ी अनिश्चितता सेक्टर पर दबाव बनाए रख सकती है। दूसरी तरफ अवसर भी मौजूद हैं। भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, रेलवे, बिजली, रियल एस्टेट और विनिर्माण क्षेत्र की मजबूत मांग मेटल कंपनियों की कमाई को समर्थन दे सकती है। यही कारण है कि अधिकांश ब्रोकरेज अभी भी लंबी अवधि के लिए पूरी तरह नकारात्मक नहीं हुए हैं।
निष्कर्ष
NALCO, Vedanta, Hindalco और अन्य मेटल शेयरों में आई हालिया गिरावट ने निवेशकों को जरूर चिंतित किया है, लेकिन इसके पीछे मुख्य वजह एल्युमिनियम की कीमतों में कमजोरी, चीन से बढ़ती सप्लाई, मुनाफावसूली और वेदांता की बड़ी ब्लॉक डील रही है। फिलहाल यह गिरावट सेक्टर की बुनियादी कहानी बदलने वाली नहीं दिखती। लंबी अवधि में भारत की मजबूत औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर मांग मेटल कंपनियों के लिए सकारात्मक बनी हुई है। इसलिए निवेशकों को केवल एक-दो दिन की गिरावट देखकर घबराने के बजाय वैश्विक कमोडिटी कीमतों, कंपनी के मुनाफे और मांग के रुझानों पर नजर रखनी चाहिए। आने वाले महीनों में यही तय करेगा कि यह केवल एक करेक्शन था या फिर किसी बड़े ट्रेंड बदलाव की शुरुआत।