क्या आपकी शिकायत भी जल्दी सुलझेगी

जानिए SEBI के SCORES 2.0 की पूरी कहानी

शेयर बाजार में निवेश करते समय सबसे बड़ी चिंता तब होती है, जब किसी कंपनी, ब्रोकर या रजिस्ट्रार से जुड़ी शिकायत का समाधान समय पर नहीं मिलता। ऐसे में अगर निवेशक की बात सुनने वाला मजबूत सिस्टम हो, तो बाजार पर भरोसा भी बढ़ता है। यही वजह है कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की ताजा रिपोर्ट निवेशकों के लिए राहत लेकर आई है। SEBI ने बताया है कि मई 2026 के दौरान उसके ऑनलाइन शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म SCORES के जरिए 5,500 से ज्यादा निवेशक शिकायतों का समाधान किया गया। इससे लंबित शिकायतों की संख्या भी काफी कम हुई है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह संकेत है कि देश का पूंजी बाजार निवेशकों के हितों की सुरक्षा की दिशा में लगातार मजबूत हो रहा है। लेकिन सवाल यह है... क्या अब निवेशकों की हर शिकायत जल्दी सुलझ जाएगी? आइए पूरी कहानी समझते हैं।
क्या है पूरा मामला ?
SEBI का SCORES (SEBI Complaints Redress System) एक ऑनलाइन शिकायत निवारण मंच है। अगर किसी निवेशक को सूचीबद्ध कंपनी, ब्रोकर, म्यूचुअल फंड, रजिस्ट्रार या किसी अन्य बाजार से जुड़ी संस्था से शिकायत होती है, तो वह इस प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे शिकायत दर्ज कर सकता है। समय के साथ शिकायतों की संख्या बढ़ने लगी थी। इसी वजह से SEBI ने SCORES 2.0 शुरू किया, जिसमें शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाई गई।
मई 2026 में क्या हुआ?
SEBI के अनुसार मई 2026 में कुल 4,918 नई शिकायतें दर्ज हुईं। इसी दौरान 5,548 शिकायतों का सफल निपटारा किया गया। इसका सीधा असर लंबित मामलों पर पड़ा। 31 मई 2026 तक लंबित शिकायतों की संख्या घटकर 5,537 रह गई, जबकि अप्रैल के अंत में यह संख्या 6,167 थी। यानी सिर्फ एक महीने में करीब 630 शिकायतें कम हुईं। यह लगातार बेहतर होती शिकायत निवारण व्यवस्था की ओर इशारा करता है।
सिर्फ 10 शिकायतें तीन महीने से ज्यादा लंबित, क्यों है यह बड़ी बात?
SEBI के अनुसार मई के अंत तक केवल 10 शिकायतें ऐसी थीं जो तीन महीने से अधिक समय से लंबित थीं। इनमें KFin Technologies, Secur Credentials और Eastern Investments जैसी संस्थाओं से जुड़े मामले शामिल हैं। हालांकि SEBI ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबित शिकायतों में कई ऐसे मामले भी शामिल होते हैं, जिनमें संबंधित संस्था समय पर जवाब दे चुकी होती है। शिकायत इसलिए खुली रहती है ताकि निवेशक यदि जवाब से संतुष्ट न हो तो वह समीक्षा की मांग कर सके। यानी हर लंबित शिकायत का मतलब यह नहीं कि उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
SCORES 2.0 कैसे करता है काम?
नई व्यवस्था के तहत शिकायत दर्ज होते ही वह संबंधित संस्था के पास स्वतः पहुंच जाती है। संस्था को 21 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) देना अनिवार्य होता है। अगर निवेशक जवाब से संतुष्ट नहीं होता तो वह 15 दिनों के भीतर प्रथम स्तर की समीक्षा मांग सकता है। इसके बाद नामित संस्था शिकायत की जांच करती है। यदि इसके बाद भी समाधान नहीं मिलता तो निवेशक अगले 15 दिनों में दूसरे स्तर की समीक्षा मांग सकता है, जहां SEBI खुद मामले की जांच करता है और अंतिम कार्रवाई रिपोर्ट जारी करता है। यही व्यवस्था शिकायत निवारण को पहले से अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाती है।