कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन से पहले कॉफी डे के शेयरों में तूफानी उछाल, 5 दिन में 55% चढ़ा शेयर

क्या वापसी की राह पर है कंपनी?

शेयर बाजार में कभी-कभी ऐसी कंपनियां अचानक निवेशकों का ध्यान खींच लेती हैं, जिन्हें लंबे समय से बाजार ने लगभग नजरअंदाज कर रखा होता है। कैफे कॉफी डे चलाने वाली कॉफी डे एंटरप्राइजेज इन दिनों कुछ ऐसा ही कर रही है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में कंपनी के शेयरों में करीब 55 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। सोमवार को शेयर 10 प्रतिशत चढ़कर 38.25 रुपये तक पहुंच गया, जबकि इससे पहले भी इसमें लगातार ऊपरी सर्किट देखने को मिला था। दिलचस्प बात यह है कि यह तेजी ऐसे समय में आई है जब एक तरफ कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार दिखाई दे रहा है और दूसरी तरफ कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस तेजी के पीछे असली वजह क्या है और क्या यह रैली आगे भी जारी रह सकती है।
पांच दिन में 55 प्रतिशत की तेजी ने खींचा बाजार का ध्यान
कॉफी डे एंटरप्राइजेज का शेयर कुछ ही दिनों पहले 24.66 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। अब यह बढ़कर 38 रुपये के पार पहुंच चुका है। इतनी कम अवधि में 55 प्रतिशत की तेजी किसी भी छोटे निवेशक और बाजार विश्लेषक का ध्यान आकर्षित करने के लिए काफी है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब कंपनी के शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला हो। लेकिन इस बार तेजी केवल सट्टेबाजी का परिणाम नहीं लग रही, बल्कि इसके पीछे कुछ मजबूत कारोबारी और भावनात्मक कारण भी दिखाई दे रहे हैं।
कर्नाटक की राजनीति और कंपनी के बीच क्या है संबंध?
कॉफी डे एंटरप्राइजेज के शेयरों में आई तेजी का एक बड़ा कारण कर्नाटक की राजनीति को माना जा रहा है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के बाद डी.के. शिवकुमार 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। निवेशकों की दिलचस्पी इसलिए बढ़ी क्योंकि डी.के. शिवकुमार का परिवार कॉफी डे समूह से जुड़ा हुआ है। उनकी बेटी ऐश्वर्या शिवकुमार का विवाह कैफे कॉफी डे के संस्थापक दिवंगत वी.जी. सिद्धार्थ के पुत्र अमर्त्य हेगड़े से हुआ है। वर्तमान में कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मालविका हेगड़े हैं, जो वी.जी. सिद्धार्थ की पत्नी हैं। हालांकि कंपनी के कारोबार और राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, लेकिन बाजार अक्सर ऐसी खबरों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है। यही वजह है कि राजनीतिक चर्चाओं ने भी निवेशकों की रुचि बढ़ाने में भूमिका निभाई।
चौथी तिमाही के नतीजों ने बदली निवेशकों की धारणा
शेयर में आई तेजी का सबसे मजबूत आधार कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजे हैं। कॉफी डे एंटरप्राइजेज ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 132.07 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। एक वर्ष पहले इसी अवधि में कंपनी को 114 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हुआ था। घाटे से सीधे मुनाफे में वापसी ने निवेशकों को बड़ा सकारात्मक संकेत दिया है। कंपनी की परिचालन आय भी बढ़कर 280.51 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 268.03 करोड़ रुपये थी। कुल आय बढ़कर 293.48 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि एक वर्ष पहले यह 279.23 करोड़ रुपये थी। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि कंपनी केवल लागत कम करने पर नहीं बल्कि कारोबार बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है।
मुख्य कारोबार में भी दिखा सुधार
कॉफी डे समूह की प्रमुख सहायक कंपनी कॉफी डे ग्लोबल ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है। कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2026 में 14 करोड़ रुपये का लाभ कमाया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में उसे लगभग 176 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। कंपनी का राजस्व बढ़कर 1,094 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं परिचालन लाभ 27 प्रतिशत बढ़कर 198 करोड़ रुपये हो गया। यह सुधार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कॉफी डे ग्लोबल ही कैफे कॉफी डे ब्रांड का मुख्य संचालन करती है। यानी कंपनी की वास्तविक कारोबारी स्थिति में सुधार दिखाई दे रहा है, जो दीर्घकालिक निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
कैफे घटे, लेकिन कारोबार का नया मॉडल बढ़ा
वित्तीय नतीजों में एक दिलचस्प बात यह भी रही कि कंपनी के कैफे आउटलेट्स की संख्या 435 से घटकर 424 रह गई। पहली नजर में यह नकारात्मक लग सकता है। लेकिन दूसरी ओर कंपनी ने अपने वेंडिंग मशीन कारोबार का विस्तार जारी रखा। वेंडिंग मशीनों की संख्या बढ़कर 55,802 हो गई, जो एक वर्ष पहले 54,100 थी। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी अधिक लाभदायक और कम लागत वाले कारोबारी मॉडल पर जोर दे रही है। यह रणनीति भविष्य में मुनाफे को और बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
फिर भी निवेशकों को क्यों बरतनी चाहिए सावधानी?
हालिया तेजी के बावजूद कुछ ऐसे तथ्य हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कंपनी का शेयर आज भी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 374.90 रुपये से लगभग 90 प्रतिशत नीचे है। इसके अलावा चौथी तिमाही के लाभ में असाधारण मदों का भी योगदान रहा है। इसलिए निवेशकों को केवल एक तिमाही के आधार पर कंपनी की पूरी तस्वीर नहीं देखनी चाहिए। कंपनी पर अतीत में कर्ज का दबाव रहा है और उसे अपनी बैलेंस शीट को और मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही कैफे नेटवर्क में गिरावट यह भी बताती है कि प्रतिस्पर्धा अभी भी चुनौती बनी हुई है।
क्या यह वापसी की शुरुआत है?
पिछले कुछ वर्षों में कॉफी डे एंटरप्राइजेज ने कई मुश्किल दौर देखे हैं। संस्थापक वी.जी. सिद्धार्थ के निधन के बाद कंपनी पर भारी कर्ज और कारोबारी दबाव बना रहा। लेकिन हाल के नतीजे संकेत देते हैं कि प्रबंधन धीरे-धीरे कंपनी को स्थिरता की ओर ले जाने में सफल हो रहा है। मुनाफे में वापसी, परिचालन प्रदर्शन में सुधार और निवेशकों का बढ़ता भरोसा कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कंपनी पूरी तरह से संकट से बाहर निकल चुकी है।
निष्कर्ष:
कॉफी डे एंटरप्राइजेज के शेयरों में आई 55 प्रतिशत की तेजी ने बाजार का ध्यान जरूर खींचा है, लेकिन इसकी कहानी केवल राजनीतिक घटनाक्रम तक सीमित नहीं है। असली ताकत कंपनी के वित्तीय सुधार, घाटे से मुनाफे में वापसी और मुख्य कारोबार में दिख रही मजबूती से आ रही है। फिर भी निवेशकों को उत्साह के साथ सतर्कता भी रखनी चाहिए। कंपनी अभी भी अपने पुराने स्वर्णिम दौर से काफी दूर है और उसके सामने कई चुनौतियां मौजूद हैं। लेकिन यदि प्रबंधन मौजूदा सुधार की गति बनाए रखने में सफल रहता है, तो यह शेयर आने वाले वर्षों में एक दिलचस्प पुनरुत्थान की कहानी बन सकता है। फिलहाल बाजार का संदेश साफ है कॉफी डे एंटरप्राइजेज को लेकर निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दे रहा है, और यही वजह है कि यह छोटा शेयर इन दिनों बाजार में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।