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अदाणी समूह ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि वह केवल भारत में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को तेजी से बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। एक ओर अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस ने 3,050 करोड़ रुपये में इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिग्रहण करने का फैसला किया है, वहीं दूसरी ओर अदाणी पोर्ट्स ने अर्जेंटीना की पहली तरलीकृत प्राकृतिक गैस निर्यात परियोजना के लिए 10 वर्ष का बड़ा समुद्री सेवा अनुबंध हासिल किया है। इन दोनों सौदों को साथ जोड़कर देखें तो स्पष्ट होता है कि समूह घरेलू ऊर्जा वितरण के डिजिटलीकरण और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला दोनों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
3,050 करोड़ रुपये की डील से क्या बदलेगा?
अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस ने इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया है। यह सौदा 3,050 करोड़ रुपये में होगा और इसके लिए प्रतिस्पर्धा आयोग सहित आवश्यक मंजूरियां ली जाएंगी। इंटेलीस्मार्ट देश की प्रमुख स्मार्ट मीटर कंपनियों में शामिल है। कंपनी के पास 2.2 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो है। इसके अधिग्रहण के बाद अदाणी एनर्जी का कुल स्थापित और अनुबंधित स्मार्ट मीटर पोर्टफोलियो 4.7 करोड़ मीटर से अधिक हो जाएगा। यह सौदा कंपनी को भारत के स्मार्ट मीटर क्षेत्र में सबसे बड़े खिलाड़ियों में शामिल कर देगा।
क्यों महत्वपूर्ण है स्मार्ट मीटर कारोबार?
देश में बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पर काम कर रही है। इन मीटरों के जरिए बिजली चोरी पर नियंत्रण, बिलिंग में पारदर्शिता और वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्मार्ट मीटर उद्योग देश के सबसे तेजी से बढ़ने वाले ऊर्जा क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। ऐसे समय में अदाणी का यह अधिग्रहण दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश माना जा रहा है।
इंटेलीस्मार्ट की तेज रफ्तार वृद्धि
इंटेलीस्मार्ट की स्थापना वर्ष 2019 में हुई थी, लेकिन कम समय में कंपनी ने तेज विस्तार दर्ज किया है। कंपनी का कारोबार वर्ष 2022-23 में 85 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वर्ष 2023-24 में 243.5 करोड़ रुपये और वर्ष 2024-25 में 621.3 करोड़ रुपये पहुंच गया। लगातार बढ़ती आय यह दिखाती है कि स्मार्ट मीटर बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है और इसी अवसर को अदाणी समूह भुनाना चाहता है।
अर्जेंटीना में मिला 10 साल का बड़ा अनुबंध
घरेलू विस्तार के साथ-साथ अदाणी समूह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नए अवसर तलाश रहा है। अदाणी पोर्ट्स ने अर्जेंटीना की पहली तरलीकृत प्राकृतिक गैस निर्यात परियोजना के लिए 10 वर्ष का समुद्री सेवा अनुबंध हासिल किया है। इस परियोजना में लगभग 7 करोड़ डॉलर का निवेश जुड़ा हुआ है। यह सौदा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए अदाणी समूह पहली बार दक्षिण अमेरिका के बाजार में प्रवेश कर रहा है।
भारत-अर्जेंटीना ऊर्जा संबंधों को मिलेगा बल
अर्जेंटीना तेजी से उभरता हुआ प्राकृतिक गैस निर्यातक देश बन रहा है। वर्ष 2027 से भारत को हर साल लगभग एक करोड़ टन गैस आपूर्ति की योजनाएं भी बन चुकी हैं। ऐसे में अदाणी पोर्ट्स की इस परियोजना में भागीदारी केवल एक कारोबारी अनुबंध नहीं है, बल्कि यह भारत और अर्जेंटीना के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने वाला कदम भी माना जा रहा है। इससे समूह को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं?
दोनों सौदे यह दिखाते हैं कि अदाणी समूह केवल पारंपरिक कारोबार तक सीमित नहीं रहना चाहता। स्मार्ट मीटरिंग जैसे भविष्य के डिजिटल ऊर्जा क्षेत्र और वैश्विक ऊर्जा लॉजिस्टिक्स जैसे उच्च विकास वाले क्षेत्रों में निवेश यह संकेत देता है कि समूह अगले दशक की मांग को ध्यान में रखकर विस्तार कर रहा है। बड़े पैमाने की परियोजनाओं से लागत में कमी, संचालन क्षमता में सुधार और दीर्घकालिक आय के नए स्रोत बनने की संभावना भी बढ़ेगी।
आगे की राह
अदाणी समूह के हालिया कदम केवल दो अलग-अलग सौदे नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक रणनीति का हिस्सा दिखाई देते हैं। एक तरफ वह भारत की बिजली व्यवस्था के डिजिटलीकरण में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है, तो दूसरी तरफ वैश्विक ऊर्जा व्यापार में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। यदि नियामकीय मंजूरियां समय पर मिलती हैं और योजनाएं तय समय पर आगे बढ़ती हैं, तो ये सौदे आने वाले वर्षों में समूह की आय और बाजार हिस्सेदारी दोनों को नई ऊंचाई दे सकते हैं। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदाणी समूह अब केवल परिसंपत्तियां जोड़ने पर नहीं, बल्कि भविष्य के ऊर्जा और बुनियादी ढांचा बाजारों में नेतृत्व स्थापित करने पर ध्यान दे रहा है। यही वजह है कि बाजार की नजर अब इन सौदों के वित्तीय लाभ और उनके दीर्घकालिक प्रभाव पर बनी रहेगी।