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मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स का लंबे इंतज़ार के बाद IPO जल्द ही बाजार में आ सकता है। इसे लेकर निवेशकों और शेयर बाजार में काफी उत्साह है। माना जा रहा है कि यह भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस जियो इस साल अपना IPO ला सकती है, जिसमें कंपनी अपनी 2.5% हिस्सेदारी बेचेगी। इससे जियो करीब ₹37,000 करोड़ जुटा सकती है। कंपनी की कुल वैल्यूएशन ₹20 लाख करोड़ तक आंकी जा रही है। फिलहाल जियो के पास 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं, जिस वजह से इसका IPO निवेशकों के बीच काफी चर्चा में है।
मार्केट रेगुलेटर SEBI बड़े IPO से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार कर रहा है। नए प्रस्ताव के तहत, कंपनियों को IPO में पहले 5% की जगह न्यूनतम 2.5% हिस्सेदारी बेचने की छूट मिल सकती है। रिलायंस इसी नियम को वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिलने का इंतजार कर रही है। कम शेयर बेचने का मकसद यह है कि बाजार में शेयरों की मांग बनी रहे।
पिछले 6 सालों में रिलायंस जियो ने KKR, Silver Lake, General Atlantic और Google जैसे बड़े विदेशी निवेशकों से निवेश जुटाया है। माना जा रहा है कि इस IPO के जरिए ये निवेशक मुनाफा लेकर अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।
जियो अब सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रही है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सर्विसेज पर भी तेजी से काम कर रही है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जियो ने NVIDIA के साथ साझेदारी की है। आने वाले समय में जियो को इलॉन मस्क की Starlink से सीधा मुकाबला करना पड़ सकता है, जो भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी में है।
खबरों के मुताबिक, अगर जियो का IPO आता है तो इसका साइज $4 बिलियन (करीब ₹33,000–37,000 करोड़) से ज्यादा हो सकता है। यह पिछले साल आए Hyundai Motor India के $3.3 बिलियन IPO से भी बड़ा होगा।रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड, जिसे आमतौर पर जियो के नाम से जाना जाता है, भारत की अग्रणी दूरसंचार कंपनियों में से एक है। यह रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और इसका मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है। जियो भारत में मोबाइल टेलीफोन, ब्रॉडबैंड और डिजिटल सेवाएँ प्रदान करती है। कंपनी देश के सभी 22 दूरसंचार सर्किलों में 4G LTE नेटवर्क का संचालन करती है और शुरुआत से ही केवल 4G VoLTE सेवाएँ उपलब्ध कराती रही है। वर्तमान में जियो ने 5G सेवाओं की भी शुरुआत कर दी है। रिलायंस जियो की स्थापना 15 फरवरी 2007 को अहमदाबाद, गुजरात में की गई थी। वर्ष 2010 में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने इन्फोटेल ब्रॉडबैंड सर्विसेज लिमिटेड का अधिग्रहण किया, जिसके पास पूरे देश के लिए 4G स्पेक्ट्रम था। जनवरी 2013 में कंपनी का नाम बदलकर रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड कर दिया गया। अंततः 5 सितंबर 2016 को जियो ने पूरे भारत में अपनी सेवाओं की आधिकारिक शुरुआत की, जिससे भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिला
हालांकि अभी तक IPO को लेकर किसी बैंक की आधिकारिक नियुक्ति नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार Morgan Stanley और Kotak Mahindra Bank रिलायंस के साथ मिलकर IPO से जुड़े दस्तावेज तैयार कर रहे हैं। कंपनी को उम्मीद है कि KKR, General Atlantic और Silver Lake जैसे निवेशक इस IPO के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।
यह अभी साफ नहीं है कि जियो का IPO सिर्फ ऑफर फॉर सेल होगा या इसमें नए शेयर भी जारी किए जाएंगे। उदाहरण के तौर पर, Hyundai Motor India का IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल था, जिसमें कंपनी को कोई नई पूंजी नहीं मिली थी।
जियो की लिस्टिंग ऐसे समय में हो सकती है, जब भारत का IPO बाजार मजबूत स्थिति में है। LSEG के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्राइमरी इक्विटी बाजार रहा, जहां करीब $21.6 अरब की फंडिंग जुटाई गई।
कुल मिलाकर, रिलायंस जियो का IPO भारतीय शेयर बाजार के लिए एक ऐतिहासिक मौका माना जा रहा है और निवेशकों की नजरें अब इसी पर टिकी हैं।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं।