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NSE IPO को इस महीने मिल सकता है सेबी अप्रूवल, 10 साल बाद खुलेगा पब्लिक इश्यू का रास्ता

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ अब जल्द हकीकत बन सकता है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) इसी महीने NSE को पब्लिक इश्यू लाने के लिए जरूरी ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) जारी कर सकता है।सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान संकेत दिए कि एनएसई को एनओसी देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और यह काम इसी महीने पूरा हो सकता है। मंजूरी मिलते ही एक्सचेंज अपने आईपीओ के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा।

2016 से अटका है NSE का IPOएनएसई ने पहली बार दिसंबर 2016 में अपने आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे। उस समय एक्सचेंज करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में था। हालांकि, इसी दौरान सामने आए को-लोकेशन विवाद ने आईपीओ की प्रक्रिया को रोक दिया।आरोप था कि कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को एक्सचेंज के सर्वर तक दूसरों से पहले पहुंच दी गई, जिससे उन्हें अनुचित लाभ हुआ। इस विवाद और लंबी कानूनी लड़ाई के कारण सेबी ने आईपीओ पर रोक लगा दी थी। इसके बाद अगस्त 2024 में NSE ने दोबारा एनओसी के लिए आवेदन किया।

विवाद सुलझाने के लिए NSE ने चुकाई भारी रकमआईपीओ की राह आसान करने के लिए एनएसई ने हाल के महीनों में कई बड़े कदम उठाए हैं। अक्टूबर 2024 में एक्सचेंज ने ट्रेडिंग एक्सेस पॉइंट (TAP) मामले में सेबी को 643 करोड़ रुपये की पेनल्टी चुकाई।इसके अलावा को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों से जुड़े पुराने विवादों के सेटलमेंट के लिए लगभग 1,300 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है। सेबी की शर्तों के अनुरूप बोर्ड और मैनेजमेंट स्ट्रक्चर में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

दुनिया का सबसे एक्टिव डेरिवेटिव एक्सचेंजएनएसई न केवल भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, बल्कि यह दुनिया का सबसे सक्रिय डेरिवेटिव एक्सचेंज भी है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है, जिसका सीधा असर एनएसई की आय और मुनाफे पर पड़ा है।वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में एनएसई का नेट प्रॉफिट लगभग 6,320 करोड़ रुपये रहा है।

पहले से मजबूत पब्लिक शेयरहोल्डर बेसNSE की एक खास बात यह है कि कंपनी के पास पहले से ही बड़ा पब्लिक शेयरहोल्डर बेस मौजूद है। वर्तमान में एक्सचेंज के करीब 1.72 लाख शेयरहोल्डर्स हैं और इसमें कोई प्रमोटर हिस्सेदारी नहीं है। यह इसे पूरी तरह से एक इंस्टीट्यूशनल स्ट्रक्चर वाला एक्सचेंज बनाता है।
सेबी की सख्ती और सुधारात्मक कदमसेबी ने पिछले कुछ वर्षों में एनएसई के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए हैं। अप्रैल 2019 में सेबी ने 62.58 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई लौटाने का आदेश दिया और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को बाजार से जुड़े पदों से प्रतिबंधित किया।इसके बाद 2022 में 7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसे बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल ने रद्द कर दिया। अक्टूबर 2024 में NSE ने TAP आर्किटेक्चर और नेटवर्क कनेक्टिविटी मामले में 643 करोड़ रुपये का सेटलमेंट कर लंबित विवादों को सुलझाया।

बाजार की पारदर्शिता पर सेबी का फोकस NSE आईपीओ के अलावा सेबी डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी सख्ती बढ़ा रहा है। तुहिन कांत पांडे के अनुसार, सेबी के एआई आधारित टूल ‘AI सुदर्शन’ की मदद से अब तक एक लाख से अधिक भ्रामक या अवैध पोस्ट हटाई जा चुकी हैं।निवेशकों की सुरक्षा के लिए सेबी ने ‘SebiCheck’ टूल लॉन्च किया है, जिससे निवेशक पैसे भेजने से पहले बैंक अकाउंट, यूपीआई या क्यूआर कोड की जांच कर सकते हैं। पांडे ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पैसा किसी फर्जी खाते में चला गया, तो निवेशकों को कोई सुरक्षा नहीं मिलती।

NSE IPO: निवेशकों के लिए बड़ा अवसर एनओसी मिलने के बाद एनएसई अपने आईपीओ को जल्द से जल्द बाजार में उतार सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी लिस्टिंग्स में से एक हो सकता है।आईपीओ से जुटाई गई पूंजी का उपयोग एक्सचेंज नई तकनीकों, इंफ्रास्ट्रक्चर और विस्तार योजनाओं में कर सकता है। अगर बाजार की स्थिति अनुकूल रही, तो यह इश्यू रिटेल और संस्थागत दोनों प्रकार के निवेशकों के लिए आकर्षक साबित हो सकता है। 

NSE के बारे में संक्षेप मेंनेशनल स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना 1992 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। यह भारत का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जो शेयर, डेरिवेटिव्स और अन्य वित्तीय साधनों में सुरक्षित, पारदर्शी और स्वचालित कारोबार की सुविधा देता है। इसके प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 और बैंक निफ्टी हैं।

Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं।