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भारत के शेयर बाजार में एक बार फिर बड़े आईपीओ की दस्तक होने जा रही है। देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल SBI Funds Management ने अपने ₹11,693 करोड़ के आईपीओ के लिए ₹545 से ₹574 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय कर दिया है। यह वर्ष 2026 का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम है और इसी वजह से बाजार, संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों की नजर इस इश्यू पर टिकी हुई है। यह केवल एक बड़ा आईपीओ नहीं है, बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते म्यूचुअल फंड उद्योग में निवेश का अवसर भी माना जा रहा है। दूसरी ओर, चूंकि यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है, इसलिए कंपनी को इस इश्यू से कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी। ऐसे में निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौजूदा वैल्यूएशन लंबी अवधि के निवेश को आकर्षक बनाता है? शेयर बाजार में इस घोषणा के बाद निवेशकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। मजबूत ब्रांड, विशाल ग्राहक आधार और लगातार बढ़ते म्यूचुअल फंड उद्योग को देखते हुए बाजार की शुरुआती धारणा सकारात्मक दिखाई दे रही है। हालांकि अंतिम फैसला कंपनी के मूल्यांकन और लिस्टिंग के बाद प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
SBI Funds Management IPO का पूरा शेड्यूल
आईपीओ में एंकर निवेशकों के लिए बोली 13 जुलाई से शुरू होगी। आम निवेशकों के लिए यह इश्यू 14 जुलाई को खुलेगा और 16 जुलाई तक खुला रहेगा। 17 जुलाई को शेयर आवंटन तय होने की संभावना है। सफल निवेशकों के डीमैट खाते में 20 जुलाई को शेयर जमा होंगे और 21 जुलाई 2026 को कंपनी के शेयर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। यह समय-सीमा उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होगी जो लिस्टिंग गेन या लंबी अवधि के निवेश की रणनीति बना रहे हैं।
प्राइस बैंड, लॉट साइज और निवेश की रकम
कंपनी ने प्रति शेयर ₹545 से ₹574 का प्राइस बैंड तय किया है। एक लॉट में 26 शेयर होंगे। ऊपरी प्राइस बैंड पर आवेदन करने वाले खुदरा निवेशकों को कम से कम ₹14,924 का निवेश करना होगा। यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है, जिसमें लगभग 20.37 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे। इसका अर्थ यह है कि कंपनी नए शेयर जारी नहीं कर रही है, बल्कि मौजूदा प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच रहे हैं। इसलिए आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि SBI और Amundi India Holding को जाएगी।
आरक्षण और निवेशकों के लिए अवसर
इश्यू का 35 प्रतिशत हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित रखा गया है। 5 प्रतिशत छोटे उच्च निवल मूल्य वाले निवेशकों (एचएनआई), 10 प्रतिशत बड़े एचएनआई और 50 प्रतिशत योग्य संस्थागत निवेशकों के लिए निर्धारित है। SBI के मौजूदा शेयरधारकों के लिए लगभग ₹750 करोड़ मूल्य के करीब 1.3 करोड़ शेयर आरक्षित किए गए हैं। वहीं पात्र कर्मचारियों को ₹54 प्रति शेयर की छूट भी मिलेगी। यह सुविधा कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त आकर्षण पैदा करती है, जबकि SBI शेयरधारकों को आरक्षित कोटा का लाभ मिलेगा।
वैल्यूएशन और हिस्सेदारी बिक्री की पूरी कहानी
ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का अनुमानित बाजार पूंजीकरण लगभग ₹1.17 लाख करोड़ बैठता है। इस इश्यू के तहत SBI अपनी 6.3 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहा है, जबकि संयुक्त उद्यम साझेदार Amundi India Holding 3.7 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश करेगी। यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है। SBI ने अपनी हिस्सेदारी बहुत कम लागत पर हासिल की थी, जिसकी औसत अधिग्रहण कीमत मात्र ₹0.15 प्रति शेयर रही। मौजूदा मूल्यांकन पर उसके निवेश का मूल्य हजारों गुना बढ़ चुका है। दूसरी ओर Amundi की औसत खरीद कीमत ₹4.35 प्रति शेयर रही और अब उसे भी अपने निवेश पर कई गुना लाभ मिलने जा रहा है। हालांकि दोनों प्रमोटर पूरी तरह बाहर नहीं निकल रहे हैं और आईपीओ के बाद भी कंपनी में उनकी मजबूत हिस्सेदारी बनी रहेगी।
भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी क्यों है खास?
SBI Funds Management केवल एक म्यूचुअल फंड कंपनी नहीं है, बल्कि भारत के निवेश उद्योग की सबसे मजबूत संस्थाओं में से एक है। दिसंबर 2025 तक कंपनी का तिमाही औसत प्रबंधित परिसंपत्ति मूल्य (QAAUM) लगभग ₹12.5 लाख करोड़ था और म्यूचुअल फंड उद्योग में इसकी हिस्सेदारी करीब 15.4 प्रतिशत रही। यदि पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं (PMS), वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) और अन्य सलाहकारी कारोबार को भी जोड़ दिया जाए तो कंपनी के प्रबंधन के तहत कुल परिसंपत्तियां ₹29 लाख करोड़ से अधिक हैं। निष्क्रिय निवेश योजनाओं यानी इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में भी कंपनी की मजबूत पकड़ है और इस क्षेत्र में इसका बाजार हिस्सा लगभग 30 प्रतिशत के करीब है। कंपनी का एसआईपी कारोबार भी मजबूत है। करोड़ों निवेशकों के सक्रिय निवेश और लंबी अवधि तक जुड़े रहने वाले ग्राहकों का बड़ा आधार भविष्य की आय को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एसेट मैनेजमेंट कंपनियों का कारोबार फीस आधारित होता है। जैसे-जैसे निवेशकों का पैसा बढ़ता है, वैसे-वैसे कंपनी की आय भी बढ़ती जाती है। भारत में म्यूचुअल फंड निवेश लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, ऐसे में इस उद्योग की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत दिखाई देती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या मौजूदा वैल्यूएशन पहले से ही भविष्य की अधिकांश संभावनाओं को कीमत में शामिल कर चुका है? यदि बाजार में अस्थिरता बढ़ती है या म्यूचुअल फंड उद्योग की वृद्धि धीमी पड़ती है तो ऐसे शेयरों पर दबाव भी आ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों को केवल ब्रांड नाम देखकर निर्णय लेने के बजाय कंपनी की कमाई, मूल्यांकन और भविष्य की वृद्धि क्षमता को साथ में परखना चाहिए।
IPO में निवेश से पहले जान लें ये जरूरी बातें
SBI Funds Management मजबूत ब्रांड, व्यापक वितरण नेटवर्क, देश के सबसे बड़े बैंक का समर्थन और तेजी से बढ़ते एसेट मैनेजमेंट कारोबार जैसी कई मजबूत विशेषताओं के साथ बाजार में उतर रही है। दूसरी ओर यह पूरी तरह OFS आधारित इश्यू है, इसलिए कंपनी के विस्तार के लिए नई पूंजी नहीं जुटाई जा रही। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सबसे बड़ा अवसर भारत में बढ़ती वित्तीय जागरूकता, SIP निवेश और म्यूचुअल फंड उद्योग का विस्तार है। वहीं सबसे बड़ा जोखिम ऊंचा वैल्यूएशन और बाजार की संभावित अस्थिरता हो सकती है। अब निवेशकों की नजर एंकर निवेशकों की प्रतिक्रिया, आईपीओ की सब्सक्रिप्शन, ग्रे मार्केट की धारणा और 21 जुलाई की संभावित लिस्टिंग पर रहेगी। यदि कंपनी सूचीबद्ध होने के बाद भी मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और परिसंपत्तियों में लगातार वृद्धि बनाए रखती है, तो यह भारतीय पूंजी बाजार की प्रमुख सूचीबद्ध एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में अपनी मजबूत पहचान बना सकती है।