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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए केंद्र सरकार की नई पहल ने शेयर बाजार में एक नए विषय को जन्म दे दिया है। सरकारी कंपनी एमएसटीसी के शेयरों में गुरुवार को 17 प्रतिशत तक की तेज़ उछाल देखने को मिली। निवेशकों ने इस तेजी को सिर्फ एक दिन की खबर नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के संभावित कारोबार से जोड़कर देखा। सरकार ने पुरानी बसों और ट्रकों को हटाकर नए और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बड़ी योजना को मंजूरी दी है। इस फैसले के बाद वाहन स्क्रैपिंग यानी पुराने वाहनों को अधिकृत केंद्रों पर नष्ट करने से जुड़े कारोबार में नई संभावनाएं दिखाई देने लगी हैं। यही कारण है कि एमएसटीसी और एमएमटीसी जैसे शेयरों में खरीदारी तेज हो गई।
सरकार की नई योजना क्या है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पुराने ट्रकों और बसों को बदलने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इस योजना में केंद्र सरकार का योगदान 5,041 करोड़ रुपये होगा, जबकि बाकी सहायता राज्यों द्वारा कर छूट और अन्य लाभों के रूप में दी जाएगी। योजना का मुख्य उद्देश्य बीएस-4 और उससे पुराने वाणिज्यिक वाहनों को हटाकर बीएस-6 और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है। इससे प्रदूषण कम करने के साथ-साथ आधुनिक परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
MSTC को सबसे बड़ा फायदा क्यों माना जा रहा है?
एमएसटीसी देश की प्रमुख ई-नीलामी और वाहन स्क्रैपिंग प्रक्रिया से जुड़ी सरकारी कंपनी है। जब पुराने वाहनों की संख्या बड़े पैमाने पर स्क्रैपिंग केंद्रों तक पहुंचेगी, तब नीलामी, धातु बिक्री और स्क्रैप प्रबंधन से जुड़े कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है। बाजार का मानना है कि योजना के तहत यदि लाखों वाहन स्क्रैपिंग प्रक्रिया में आते हैं तो एमएसटीसी के लिए यह एक बड़ा व्यावसायिक अवसर बन सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने इस खबर को कंपनी के भविष्य के राजस्व से जोड़कर देखा।
शेयर बाजार में कैसा रहा असर?
सरकारी घोषणा के बाद एमएसटीसी शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। शेयर एक समय 17.31 प्रतिशत तक उछल गया और 500 रुपये के स्तर के ऊपर पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह लगभग 13 प्रतिशत की बढ़त के साथ 504 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा। दूसरी ओर, स्क्रैपिंग क्षेत्र से जुड़ी एक अन्य सरकारी कंपनी एमएमटीसी के शेयरों में भी 7 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि निवेशक इस पूरे क्षेत्र में आने वाले संभावित विकास को लेकर उत्साहित हैं।
किन वाहनों को मिलेगा योजना का लाभ?
सरकार के अनुसार यह योजना लगभग 2.07 लाख वाहनों को कवर करेगी। इनमें करीब 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें शामिल हैं। योजना के तहत वाहन मालिकों को अपने पुराने वाहन अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों पर जमा करने होंगे या उन्हें उन शहरों में बेचना होगा जो राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के दायरे में नहीं आते। इसके बाद नए बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर विभिन्न प्रकार की आर्थिक सहायता मिलेगी।
वाहन मालिकों को क्या-क्या लाभ मिलेंगे?
योजना को आकर्षक बनाने के लिए कई बड़े प्रोत्साहन दिए गए हैं। वाहन खरीदने के लिए लिए गए ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज सहायता दी जाएगी। तेल विपणन कंपनियों की ओर से पांच वर्षों तक मासिक ईंधन वाउचर दिए जाएंगे। नए वाहनों पर पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ होगा। राज्य सरकारें मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत तक की छूट देंगी। पुराने बीएस-6 वाहनों की खरीद पर भी 50 प्रतिशत तक कर राहत मिलेगी। इसके अलावा वाहन निर्माता कंपनियां भी नए वाहनों पर लगभग 8 प्रतिशत तक की छूट देंगी।
प्रदूषण कम करने में कितनी मदद मिलेगी?
सरकार के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में ट्रक और बसें कुल वाहनों का केवल 3 प्रतिशत हिस्सा हैं, लेकिन परिवहन क्षेत्र से होने वाले सूक्ष्म प्रदूषण कणों में इनका योगदान 36 प्रतिशत तक है। अध्ययन बताते हैं कि पुराने भारी वाहन नए बीएस-6 वाहनों की तुलना में कई गुना अधिक प्रदूषण फैलाते हैं। बीएस-4 वाहन भी बीएस-6 मॉडल की तुलना में लगभग 2.7 गुना अधिक प्रदूषण करते हैं। ऐसे में पुराने वाहनों को हटाना प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी होगा फायदा
इस योजना से केवल स्क्रैपिंग उद्योग ही नहीं, बल्कि वाहन निर्माता कंपनियों को भी लाभ मिलने की संभावना है। जब लाखों वाहन मालिक नए ट्रक और बसें खरीदेंगे, तब वाहन बिक्री बढ़ सकती है। उद्योग संगठनों और प्रमुख वाहन निर्माताओं ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे वाहन क्षेत्र में नई मांग पैदा होगी और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
निवेशकों के लिए क्या हैं प्रमुख संकेत?
बाजार फिलहाल इस योजना को दीर्घकालिक अवसर के रूप में देख रहा है। हालांकि एमएसटीसी की आय पर इसका वास्तविक असर तब दिखाई देगा जब स्क्रैपिंग प्रक्रिया बड़े पैमाने पर शुरू होगी। फिलहाल शेयर में आई तेजी उम्मीदों पर आधारित है। इसलिए निवेशकों को कंपनी के आगामी तिमाही नतीजों, स्क्रैपिंग कारोबार की वृद्धि और सरकारी परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखनी होगी। यदि योजना सफल रहती है तो एमएसटीसी आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की प्रमुख लाभार्थी कंपनियों में शामिल हो सकती है।
निष्कर्ष:
एमएसटीसी के शेयरों में आई 17 प्रतिशत की तेजी केवल एक दिन की बाजार प्रतिक्रिया नहीं मानी जा रही। इसके पीछे सरकार की वह योजना है जो दिल्ली-एनसीआर में 2 लाख से अधिक पुराने ट्रकों और बसों को बदलने का लक्ष्य रखती है। स्क्रैपिंग उद्योग, वाहन बिक्री और स्वच्छ परिवहन के इस बड़े अभियान में एमएसटीसी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यही कारण है कि निवेशक कंपनी को नए अवसरों के नजरिए से देखने लगे हैं। हालांकि अल्पकाल में उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन यदि योजना जमीन पर सफलतापूर्वक लागू होती है तो यह एमएसटीसी के कारोबार और निवेशकों दोनों के लिए एक लंबी अवधि का अवसर साबित हो सकती है। फिलहाल बाजार का संदेश साफ है सरकार की नई वाहन बदलाव योजना ने एमएसटीसी को फिर से निवेशकों के रडार पर ला दिया है।