Jio IPO, AI और ग्रीन एनर्जी के दम पर Reliance की नई उड़ान

ब्रोकरेज को दिख रहा 28% तक अपसाइड

देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज एक बार फिर निवेशकों के बीच चर्चा का केंद्र बन गई है। वजह सिर्फ जियो का प्रस्तावित आईपीओ नहीं है, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित ऊर्जा, रिटेल और उपभोक्ता कारोबार में कंपनी की आक्रामक विस्तार योजना भी है। हाल ही में हुई कंपनी की 49वीं वार्षिक आम बैठक के बाद कई प्रमुख ब्रोकरेज हाउस ने शेयर पर अपना भरोसा दोहराया है और 23% से 28% तक तेजी की संभावना जताई है। यह खबर निवेशकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रिलायंस अब केवल तेल और दूरसंचार कंपनी नहीं रह गई है। कंपनी एक ऐसे समूह में बदल रही है जिसके पास एक साथ कई बड़े विकास इंजन मौजूद हैं। वहीं ग्राहकों और आम लोगों के लिए इसका मतलब है बेहतर डिजिटल सेवाएं, नए तकनीकी समाधान, सस्ती उपभोक्ता वस्तुएं और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी सुविधाएं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर AGM में ऐसा क्या हुआ जिससे बाजार का भरोसा और मजबूत हो गया? आइए पूरी कहानी समझते हैं।
Jio IPO अब हकीकत के और करीब, निवेशकों की उम्मीदें बढ़ीं
AGM की सबसे बड़ी घोषणा जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर रही। कंपनी ने बताया कि जियो के बोर्ड ने आईपीओ से जुड़े दस्तावेजों को मंजूरी देकर नियामक संस्था के पास जमा कर दिया है। इससे संकेत मिलता है कि 2026 के अंत तक जियो शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रिलायंस के लिए वैल्यू अनलॉकिंग का सबसे बड़ा अवसर बन सकता है। जियो का अनुमानित मूल्य 11 से 12 लाख करोड़ रुपये के बीच बताया जा रहा है। आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग कर्ज घटाने और भविष्य की परियोजनाओं में निवेश के लिए किया जा सकता है।
जियो का प्रदर्शन आज भी रिलायंस की सबसे बड़ी ताकत 
रिलायंस की विकास कहानी में जियो सबसे मजबूत स्तंभ बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 के अंत तक जियो के ग्राहकों की संख्या 52 करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि 26 करोड़ से ज्यादा लोग 5जी सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। कंपनी का राजस्व लगभग 15% बढ़ा और परिचालन लाभ में करीब 19% की वृद्धि दर्ज की गई। जियो एयरफाइबर के जरिए करोड़ों घरों तक इंटरनेट पहुंच रहा है और रोज हजारों नए कनेक्शन जुड़ रहे हैं। यही वजह है कि अधिकांश ब्रोकरेज मानते हैं कि आने वाले वर्षों में रिलायंस की कमाई बढ़ाने में जियो की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहने वाली है।
अब योजना नहीं, जमीन पर उतर रही है Reliance Intelligence
कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर रिलायंस ने इस बार सिर्फ वादे नहीं किए बल्कि स्पष्ट कार्ययोजना भी पेश की। कंपनी जामनगर में विशाल AI डेटा सेंटर स्थापित कर रही है, जिसकी शुरुआती क्षमता 120 मेगावाट होगी। रिलायंस भारतीय भाषाओं में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और छोटे कारोबारों के लिए AI आधारित समाधान विकसित कर रही है। गूगल और मेटा जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी इस महत्वाकांक्षी योजना को और मजबूती देती है। अगर यह रणनीति सफल होती है तो रिलायंस भारत के AI इकोसिस्टम में अग्रणी भूमिका निभा सकती है।
रिटेल और FMCG कारोबार को मिल रहा नया रूप
रिलायंस अब केवल स्टोर खोलने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी विनिर्माण, आपूर्ति श्रृंखला और निर्यात आधारित मॉडल पर तेजी से काम कर रही है। रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का लक्ष्य 2030 तक 1 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हासिल करना है। इसके लिए कंपनी खाद्य प्रसंस्करण, पेय पदार्थ, परिधान और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में बड़े निवेश कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या रिलायंस स्थापित FMCG कंपनियों को चुनौती दे पाएगी? विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का विशाल वितरण नेटवर्क उसे बड़ी बढ़त दे सकता है।
न्यू एनर्जी कारोबार अब कमाई की ओर बढ़ रहा
कई वर्षों से निवेशक रिलायंस की हरित ऊर्जा योजनाओं का इंतजार कर रहे थे। अब पहली बार इन परियोजनाओं से वास्तविक आय आने की उम्मीद दिख रही है। कंपनी का सौर मॉड्यूल उत्पादन शुरू हो चुका है और बैटरी निर्माण परियोजनाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 से इस क्षेत्र से व्यावसायिक राजस्व आना शुरू हो जाएगा। ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं आने वाले दशक में रिलायंस की नई पहचान बन सकती हैं।
पुराना कारोबार अभी भी है सबसे बड़ा नकदी स्रोत
हालांकि निवेशकों का ध्यान AI और जियो पर है, लेकिन कंपनी का तेल-से-रसायन कारोबार आज भी उसकी वित्तीय ताकत बना हुआ है। पेट्रोकेमिकल उत्पादों के बेहतर मार्जिन और मजबूत मांग की वजह से यह कारोबार लगातार नकदी पैदा कर रहा है। यही पैसा रिलायंस को नए क्षेत्रों में बड़े निवेश करने की क्षमता देता है। यानी भविष्य की महत्वाकांक्षाओं की नींव आज भी कंपनी के पारंपरिक कारोबार पर टिकी हुई है।
AGM के बाद शेयर में क्यों आई तेजी?
AGM के बाद रिलायंस का शेयर करीब 3% तक उछल गया। निवेशकों ने जियो आईपीओ, AI इंफ्रास्ट्रक्चर, रिटेल विस्तार और ग्रीन एनर्जी योजनाओं को सकारात्मक संकेत माना। तकनीकी विश्लेषक अजीत मिश्रा का मानना है कि यदि शेयर 1,380 रुपये के स्तर के ऊपर टिकता है तो इसमें 1,475 रुपये तक जाने की संभावना बन सकती है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 13% की तेजी दर्शाता है। वहीं जेफरीज, नोमुरा और मोतीलाल ओसवाल जैसे संस्थानों ने शेयर पर खरीदारी की राय बरकरार रखते हुए 1,640 रुपये से 1,675 रुपये तक के लक्ष्य दिए हैं।
AGM ने क्या बदला और क्या नहीं?
AGM ने रिलायंस की मूल कहानी नहीं बदली, लेकिन कई योजनाओं को स्पष्ट समयसीमा और दिशा जरूर दे दी। जियो आईपीओ अब केवल संभावना नहीं बल्कि सक्रिय प्रक्रिया बन चुका है। AI परियोजनाएं निर्माण चरण में पहुंच गई हैं और न्यू एनर्जी कारोबार से राजस्व आने की उम्मीद भी करीब दिख रही है। दूसरी ओर रिटेल और उपभोक्ता कारोबार को केवल स्टोर विस्तार की बजाय उत्पादन और निर्यात आधारित मॉडल में बदला जा रहा है। यही बदलाव भविष्य में रिलायंस के मूल्यांकन को नई ऊंचाई दे सकता है।
निष्कर्ष:
रिलायंस इंडस्ट्रीज आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ उसके पारंपरिक कारोबार मजबूत नकदी प्रवाह दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ जियो, AI, रिटेल और ग्रीन एनर्जी जैसे नए क्षेत्र भविष्य की कमाई के बड़े स्रोत बनते दिख रहे हैं। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी अब कई मोर्चों पर एक साथ मूल्य सृजन करने की स्थिति में है। हालांकि बड़े निवेशों के साथ जोखिम भी जुड़े रहते हैं, लेकिन यदि जियो आईपीओ सफल रहता है, AI परियोजनाएं समय पर शुरू होती हैं और न्यू एनर्जी कारोबार अपेक्षित परिणाम देता है, तो रिलायंस आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार की सबसे मजबूत विकास कहानियों में से एक बन सकती है। यही कारण है कि बाजार के बड़े विशेषज्ञ अभी भी इस शेयर को लेकर आशावादी नजर आ रहे हैं।