JSW Steel में विदेशी और घरेलू दिग्गजों की बड़ी एंट्री 

GQG और SBI MF ने खरीदी ₹3,150 करोड़ की हिस्सेदारी

भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर बड़ी संस्थागत खरीदारी ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। देश की दिग्गज स्टील कंपनी JSW Steel में वैश्विक निवेश फर्म GQG Partners और SBI Mutual Fund ने मिलकर 1 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी खरीदी है। यह सौदा ऐसे समय हुआ है, जब भारतीय स्टील सेक्टर मजबूत मांग, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और क्षमता विस्तार के दम पर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। इस बड़े ब्लॉक डील के बाद बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या JSW Steel आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनियों में शामिल हो सकती है। खास बात यह भी है कि इस डील के पीछे सिर्फ हिस्सेदारी खरीदना नहीं, बल्कि भारत की लंबी अवधि की विकास कहानी पर बड़ा भरोसा दिखाई देता है।
₹3,150 करोड़ की ब्लॉक डील ने खींचा बाजार का ध्यान 18 मई को हुए ओपन मार्केट ट्रांजैक्शन में JSW Energy ने JSW Steel के 2.5 करोड़ शेयर बेचे। यह सौदा करीब ₹3,150 करोड़ का रहा। इस डील में सबसे बड़े खरीदार बने GQG Partners Emerging Markets Equity Fund, जिसने 1.5 करोड़ शेयर खरीदे। यह कंपनी में लगभग 0.61 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। इस खरीद की कुल वैल्यू करीब ₹1,890 करोड़ रही। वहीं SBI Mutual Fund ने 1 करोड़ शेयर खरीदे, जिसकी कीमत लगभग ₹1,260 करोड़ रही। दोनों सौदे ₹1,260 प्रति शेयर के भाव पर हुए। GQG Partners वही निवेश फर्म है जिसने पहले Adani Group की कंपनियों में निवेश कर बाजार का ध्यान खींचा था। ऐसे में JSW Steel में उसकी बड़ी खरीद को बाजार एक मजबूत सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है।
क्यों बेचने पड़े JSW Energy को शेयर?
इस डील में विक्रेता JSW Group की ही कंपनी JSW Energy रही। कंपनी ने साफ कहा कि यह हिस्सेदारी बिक्री उसकी पूंजी आवंटन रणनीति का हिस्सा है। JSW Energy इस समय बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर आक्रामक तरीके से काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 30 गीगावॉट से अधिक क्षमता हासिल करना है। इसके लिए उसे भारी निवेश की जरूरत है। कंपनी ने हाल ही में रिन्यूएबल और थर्मल पावर दोनों क्षेत्रों में तेजी से विस्तार शुरू किया है। FY26 में कंपनी ने 2.6 GW क्षमता जोड़ी। इसके अलावा 14 GW क्षमता निर्माणाधीन है और 4.6 GW पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स में शामिल है। ऐसे में JSW Steel में हिस्सेदारी बेचकर पूंजी जुटाना कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि हिस्सेदारी बेचने के बाद भी JSW Energy के पास JSW Steel के 4.5 करोड़ शेयर बने हुए हैं।
JSW Steel पर क्यों बढ़ रहा है निवेशकों का भरोसा?
संस्थागत निवेशकों की इस बड़ी खरीदारी के पीछे कई मजबूत कारण दिखाई दे रहे हैं। सबसे बड़ा कारण है कंपनी का मजबूत वित्तीय प्रदर्शन। मार्च तिमाही में JSW Steel का राजस्व सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर ₹51,180 करोड़ पहुंच गया। वहीं EBITDA में 40 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई और यह ₹8,634 करोड़ पर पहुंच गया। मार्जिन में भी मजबूत सुधार देखने को मिला। घरेलू स्टील मांग, ऑटो सेक्टर की रिकवरी और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ने से कंपनी को फायदा मिला है। ब्रोकरेज हाउस Jefferies ने भी JSW Steel पर भरोसा जताते हुए अपने लक्ष्य मूल्य को ₹1,400 से बढ़ाकर ₹1,650 कर दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 29 प्रतिशत की संभावित तेजी को दर्शाता है। Jefferies का मानना है कि कंपनी FY32 तक अपनी उत्पादन क्षमता 80 मिलियन टन तक ले जा सकती है। ऐसा होने पर JSW Steel दुनिया की शीर्ष तीन स्टील कंपनियों में शामिल हो सकती है।
भारत की विकास कहानी पर बड़ा दांव
GQG और SBI Mutual Fund की यह खरीद सिर्फ एक साधारण निवेश नहीं मानी जा रही। यह भारत की औद्योगिक वृद्धि और इंफ्रास्ट्रक्चर बूम पर बड़ा भरोसा भी दिखाती है। सरकार रेलवे, सड़क, बंदरगाह, रक्षा और निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खर्च कर रही है। इन सभी सेक्टर्स में स्टील की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया का सबसे बड़ा स्टील ग्रोथ मार्केट बन सकता है। चीन में मांग कमजोर पड़ने के बाद वैश्विक कंपनियां भी अब भारत को अगला बड़ा अवसर मान रही हैं। ऐसे माहौल में JSW Steel जैसी कंपनियां निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही हैं।
शेयर बाजार में कैसा रहा असर?
ब्लॉक डील की खबर के बाद JSW Steel के शेयरों में तेजी देखने को मिली। NSE पर शेयर 1 प्रतिशत से अधिक बढ़कर ₹1,292.8 तक पहुंच गया। हालांकि शुरुआती कारोबार में शेयर ने हल्की कमजोरी भी दिखाई और ₹1,265 के स्तर तक फिसला, क्योंकि ब्लॉक डील डिस्काउंट पर हुई थी। लेकिन बाद में खरीदारी लौट आई। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो शेयर अभी भी प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर बना हुआ है, जो इसकी मजबूती को दर्शाता है। 19 मई 2026 को सुबह 9:30 बजे JSW Steel का शेयर ₹1,285.40 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
भारतीय स्टील सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह डील?
यह सौदा सिर्फ JSW Steel तक सीमित नहीं है। इससे पूरे भारतीय स्टील सेक्टर को लेकर सकारात्मक संकेत गया है। जब वैश्विक निवेशक किसी सेक्टर में बड़ी हिस्सेदारी खरीदते हैं, तो यह उस सेक्टर की भविष्य की संभावनाओं पर भरोसे को दर्शाता है। भारत में स्टील की प्रति व्यक्ति खपत अभी भी विकसित देशों के मुकाबले काफी कम है। सरकार की “मेक इन इंडिया” और इंफ्रास्ट्रक्चर नीतियां आने वाले वर्षों में मांग को और बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा चीन की उत्पादन नीतियों और वैश्विक सप्लाई बदलावों का फायदा भी भारतीय कंपनियों को मिल सकता है।
क्या निवेशकों के लिए अभी भी मौका बाकी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि JSW Steel लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनी बनी हुई है। कंपनी लगातार क्षमता विस्तार कर रही है, बैलेंस शीट मजबूत है और घरेलू मांग का फायदा भी मिल रहा है। साथ ही संस्थागत निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी बाजार का भरोसा और मजबूत करती है। हालांकि स्टील सेक्टर वैश्विक कमोडिटी कीमतों, आयात नीति और चीन की मांग जैसे कारकों से प्रभावित होता है। इसलिए निवेशकों को उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। फिर भी जिस तरह से बड़े वैश्विक और घरेलू निवेशक JSW Steel में भरोसा दिखा रहे हैं, उससे यह साफ है कि बाजार कंपनी की लंबी अवधि की कहानी को लेकर काफी आशावादी है।
निष्कर्ष
JSW Steel में GQG Partners और SBI Mutual Fund की ₹3,150 करोड़ की बड़ी खरीद सिर्फ एक ब्लॉक डील नहीं, बल्कि भारतीय स्टील सेक्टर और देश की आर्थिक वृद्धि पर मजबूत भरोसे का संकेत है। JSW Energy ने जहां अपने विस्तार के लिए पूंजी जुटाने का रास्ता चुना, वहीं बड़े निवेशकों ने JSW Steel के भविष्य पर बड़ा दांव लगाया है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, आक्रामक क्षमता विस्तार और बढ़ती घरेलू मांग के बीच JSW Steel अब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्टील उद्योग में भी अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।