ITC शेयर क्यों बना रहता है निवेशकों की पसंद

Q4 नतीजे, डिविडेंड और भविष्य की रणनीति समझिए

अगर कोई ऐसी भारतीय कंपनी है जिसने वर्षों से अपने शेयरधारकों का भरोसा लगातार बनाए रखा है, तो उसमें ITC का नाम सबसे ऊपर आता है। मजबूत कमाई, नियमित डिविडेंड और कई कारोबारों में फैली मौजूदगी ने इसे लंबे समय के निवेशकों की पसंद बनाया है। इस बार भी कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹14.50 प्रति शेयर का कुल डिविडेंड घोषित किया है और कुल मिलाकर करीब ₹18,168 करोड़ शेयरधारकों को लौटाने जा रही है। लेकिन यह खबर सिर्फ डिविडेंड तक सीमित नहीं है। ITC का FMCG कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, उसके उत्पाद अब देश के 28 करोड़ घरों तक पहुंच चुके हैं और कंपनी लगातार नए उत्पाद बाजार में उतार रही है। यही वजह है कि निवेशक सिर्फ मौजूदा कमाई नहीं बल्कि आने वाले वर्षों की संभावनाओं पर भी नजर बनाए हुए हैं। तो आखिर ITC की कमाई कहां से आती है, कंपनी की नई रणनीति क्या है, विदेशी निवेशक क्यों अब भी इसमें भरोसा बनाए हुए हैं और आगे निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए? आइए पूरी कहानी समझते हैं। ITC Chairman and Managing Director Sanjeev Puri
आखिर ITC की कमाई कहां से आती है?
ITC की सबसे बड़ी ताकत उसका विविध कारोबार है। कंपनी केवल सिगरेट बनाने वाली कंपनी नहीं रह गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कुल सकल राजस्व ₹80,867 करोड़ रहा। इसमें सबसे बड़ा योगदान सिगरेट कारोबार का रहा, जिसने लगभग ₹37,100 करोड़ यानी करीब 46 प्रतिशत राजस्व दिया। दूसरी ओर, कंपनी का गैर-सिगरेट FMCG कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। खाद्य पदार्थ, बिस्कुट, आटा, नूडल्स, डेयरी उत्पाद, व्यक्तिगत देखभाल के सामान, नोटबुक, अगरबत्ती और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं से कंपनी को लगभग ₹24,200 करोड़ का कारोबार मिला। इसके अलावा कृषि कारोबार और पेपर व पैकेजिंग व्यवसाय भी कंपनी की कमाई में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यही विविधता ITC को बाजार की अनिश्चितताओं में भी अपेक्षाकृत मजबूत बनाती है। FMCG कारोबार बना नई वृद्धि का इंजन
पिछले कुछ वर्षों में ITC ने अपने FMCG कारोबार पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया है। अब कंपनी के 30 से अधिक प्रमुख ब्रांड बाजार में मजबूत स्थिति बना चुके हैं। आशीर्वाद आटा, सनफीस्ट, बिंगो, यिप्पी, क्लासमेट, फियामा और मंगलदीप जैसे ब्रांड देशभर में लोकप्रिय हैं। कंपनी के अनुसार इन ब्रांडों पर उपभोक्ताओं का कुल वार्षिक खर्च अब ₹37,000 करोड़ से अधिक हो चुका है। FY26 के दौरान FMCG कारोबार की आय 10.1 प्रतिशत बढ़कर ₹24,209 करोड़ पहुंच गई। यही नहीं, कंपनी ने लगभग 100 नए उत्पाद भी बाजार में उतारे, जिससे यह साफ है कि ITC केवल पुराने उत्पादों पर निर्भर नहीं रहना चाहती।
मजबूत ब्रांड बना रहे हैं बाजार में पकड़
ITC की सबसे बड़ी ताकत उसके मजबूत ब्रांड हैं। आशीर्वाद पैक्ड आटे के बाजार में अग्रणी है। बिंगो स्नैक्स की अपनी श्रेणी में शीर्ष स्थान पर है। सनफीस्ट क्रीम बिस्कुट में मजबूत पकड़ बनाए हुए है। क्लासमेट नोटबुक बाजार में अग्रणी ब्रांड है, जबकि यिप्पी और मंगलदीप भी अपनी-अपनी श्रेणियों में शीर्ष कंपनियों में शामिल हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बढ़त आगे भी जारी रहेगी? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी लगातार नए उत्पाद लाती रही और ग्रामीण व शहरी बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाती रही, तो FMCG कारोबार आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सकता है।
डिविडेंड ही क्यों बना हुआ है सबसे बड़ा आकर्षण?
ITC को लंबे समय से "डिविडेंड किंग" कहा जाता है और इसकी वजह भी साफ है। कंपनी ने FY26 के लिए ₹14.50 प्रति शेयर का कुल डिविडेंड घोषित किया है, जिसमें ₹6.50 का अंतरिम और ₹8 का अंतिम डिविडेंड शामिल है। कुल डिविडेंड भुगतान ₹18,167.65 करोड़ रहने वाला है। पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड भी बताता है कि ITC लगातार अपने शेयरधारकों को अच्छा लाभांश देती रही है। यही कारण है कि नियमित आय चाहने वाले निवेशकों के बीच यह शेयर काफी लोकप्रिय बना हुआ है।
BAT को मिले लगभग ₹3,896 करोड़
ITC के शेयरधारिता ढांचे का सबसे दिलचस्प पहलू ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको (BAT) समूह की हिस्सेदारी है। हालांकि पिछले वर्षों में BAT की हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम हुई है, लेकिन उसकी सहयोगी कंपनियां अभी भी ITC की सबसे बड़ी शेयरधारकों में शामिल हैं। FY26 के दौरान केवल BAT से जुड़ी कंपनियों को लगभग ₹3,896 करोड़ का डिविडेंड मिला। इसमें टोबैको मैन्युफैक्चरर्स (इंडिया) को करीब ₹3,198 करोड़ और मिडलटन इन्वेस्टमेंट कंपनी को लगभग ₹698 करोड़ प्राप्त हुए। यह आंकड़ा दिखाता है कि विदेशी रणनीतिक निवेशकों का ITC पर भरोसा अब भी कायम है।
विदेशी निवेशकों की मजबूत मौजूदगी क्या संकेत देती है?
BAT के अलावा विदेशी संस्थागत निवेशक भी ITC में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। विदेशी कंपनियों के पास लगभग 22.91 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के पास करीब 11.92 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा ITC के उत्पाद 112 देशों में निर्यात किए जाते हैं और FMCG उत्पाद 70 से अधिक देशों में उपलब्ध हैं। इससे कंपनी केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रह गई है। ITC शेयर प्राइस और बिजनेस स्ट्रक्चर: ITC के मजबूत वित्तीय नतीजों और रिकॉर्ड डिविडेंड के बीच निवेशकों की नजर अब कंपनी के शेयर की चाल पर टिकी हुई है। पिछले कुछ महीनों में ITC के शेयर में दबाव देखने को मिला, लेकिन हालिया संकेत बताते हैं कि शेयर धीरे-धीरे संभलने की कोशिश कर रहा है। 29 जून 2026 तक ITC का शेयर लगभग ₹290 पर कारोबार कर रहा था। पिछले 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर ₹427 और न्यूनतम स्तर ₹275 रहा है। यानी शेयर अभी भी अपने 52-हफ्ते के उच्च स्तर से करीब 32% नीचे कारोबार कर रहा है। वहीं, पिछले एक महीने में शेयर में लगभग 5% की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, ₹275 के निचले स्तर से आई रिकवरी ने बाजार में नई उम्मीदें जरूर जगाई हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ITC के शेयर में अब नई तेजी देखने को मिल सकती है? विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का तेजी से बढ़ता FMCG कारोबार, लगातार मिलने वाला आकर्षक डिविडेंड, मजबूत नकदी प्रवाह और नए उत्पादों की लॉन्चिंग शेयर के लिए सकारात्मक संकेत हैं। दूसरी ओर, कच्चे माल की बढ़ती लागत, सिगरेट कारोबार पर करों का दबाव और बाजार की अस्थिरता ऐसे जोखिम हैं जिन पर निवेशकों को नजर रखनी होगी। कई ब्रोकरेज हाउस ने ITC के लिए ₹325 से ₹335 तक का लक्ष्य दिया है, जबकि कुछ संस्थानों ने फिलहाल सतर्क रुख बनाए रखने की सलाह दी है।
ITC का कारोबार कितना बड़ा है?
ITC आज केवल सिगरेट बनाने वाली कंपनी नहीं है, बल्कि यह भारत के सबसे बड़े विविध कारोबार (Diversified Business Group) में से एक बन चुकी है। कंपनी के 6 प्रमुख बिजनेस वर्टिकल हैं
● FMCG – सिगरेट कारोबार
● FMCG – अन्य उपभोक्ता उत्पाद (आशीर्वाद, सनफीस्ट, बिंगो, यिप्पी, क्लासमेट, फियामा, मंगलदीप आदि) ● होटल कारोबार
● पेपरबोर्ड, पेपर एवं पैकेजिंग
● कृषि (एग्री) कारोबार
● आईटी सेवाएं (IT Services) इन मुख्य कारोबारों के अलावा ITC के पास 20 से अधिक सहायक (Subsidiary), संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) और सहयोगी (Associate) कंपनियां हैं। इनमें ITC Hotels Limited, Surya Nepal Pvt. Ltd., Technico Agri Sciences, Wimco Limited, Russell Credit Limited और Fortune Park Hotels Limited जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। यही विविध कारोबार ITC को किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहने से बचाता है और लंबे समय में स्थिर आय का आधार प्रदान करता है। चुनौतियां भी कम नहीं हैं
हालांकि तस्वीर पूरी तरह आसान नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे माल और ईंधन की लागत बढ़ी है। इससे कंपनी की लागत पर दबाव बना हुआ है। साथ ही सिगरेट कारोबार पर बढ़ते कर और नियम भी कंपनी के लिए चुनौती बने हुए हैं। इसके बावजूद ITC का कहना है कि वह लागत नियंत्रित करने, उत्पादों में नवाचार बढ़ाने और नए बाजारों में विस्तार की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।
निवेशकों को आगे किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
आने वाले समय में निवेशकों के लिए चार बातें सबसे महत्वपूर्ण रहेंगी। पहली, क्या FMCG कारोबार की दोहरे अंक वाली वृद्धि जारी रहती है। दूसरी, क्या कंपनी भविष्य में भी इसी तरह मजबूत डिविडेंड देती रहती है। तीसरी, "ITC Next" रणनीति के तहत किए गए नए अधिग्रहण और नए ब्रांड कितना योगदान देते हैं। और चौथी, लागत बढ़ने के बावजूद कंपनी अपने लाभ मार्जिन को कितना सुरक्षित रख पाती है। विश्लेषकों का मानना है कि ITC का विविध कारोबार और मजबूत नकदी प्रवाह इसे लंबी अवधि के लिए अपेक्षाकृत मजबूत कंपनी बनाए रख सकता है, हालांकि निवेशकों को तिमाही नतीजों और FMCG कारोबार की गति पर लगातार नजर रखनी चाहिए।
निष्कर्ष 
ITC आज केवल सिगरेट बनाने वाली कंपनी नहीं रही। खाद्य पदार्थों, व्यक्तिगत देखभाल, स्टेशनरी, कृषि कारोबार, पैकेजिंग और निर्यात में उसका विस्तार उसे एक मजबूत बहु-व्यवसाय समूह बना चुका है। ₹18,168 करोड़ का डिविडेंड, ₹37,000 करोड़ से अधिक का FMCG उपभोक्ता खर्च, 28 करोड़ परिवारों तक पहुंच और 70 से ज्यादा देशों में मौजूदगी यह दिखाती है कि कंपनी अपने कारोबार का दायरा लगातार बढ़ा रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या आने वाले वर्षों में FMCG कारोबार सिगरेट पर कंपनी की निर्भरता को और कम कर पाएगा? यदि ITC अपने नए ब्रांडों, वैश्विक विस्तार और मजबूत नकदी प्रवाह को इसी तरह बनाए रखती है, तो यह न केवल नियमित डिविडेंड देने वाली कंपनी बनी रहेगी, बल्कि लंबी अवधि में विकास की नई कहानी भी लिख सकती है। यही कारण है कि निवेशकों के लिए ITC आने वाले समय में भी नजर रखने योग्य प्रमुख शेयरों में शामिल रहेगी।