Gold Price Crash

18 साल की सबसे बड़ी मासिक गिरावट! क्या अब सोना खरीदने का सही समय है?

सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता है। जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक अक्सर सोने की ओर रुख करते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग है। मंगलवार को सोने की कीमतों में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह अक्टूबर 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट की ओर बढ़ता दिखाई दिया। चांदी समेत दूसरे कीमती धातुओं पर भी दबाव बना हुआ है। यह खबर केवल सर्राफा बाजार तक सीमित नहीं है। इसका असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है जो शादी के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, गोल्ड ETF या डिजिटल गोल्ड में निवेश करते हैं या कमोडिटी बाजार में कारोबार करते हैं। ऐसे में हर निवेशक के मन में एक ही सवाल है क्या यह खरीदारी का मौका है या अभी और गिरावट बाकी है? लेकिन सवाल यह है कि आखिर सोने की चमक अचानक फीकी क्यों पड़ गई? आइए पूरी तस्वीर आसान भाषा में समझते हैं।
MCX पर सोना-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट
घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर मंगलवार सुबह सोने और चांदी दोनों में तेज बिकवाली देखने को मिली। सुबह के कारोबार में अगस्त वायदा सोना करीब 1.28% टूटकर ₹1,40,574 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं सितंबर वायदा चांदी करीब 1.04% गिरकर ₹2,20,322 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। यह गिरावट बताती है कि केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार ही नहीं, बल्कि भारतीय बाजार में भी निवेशकों का रुख फिलहाल सावधानी वाला बना हुआ है।
COMEX पर भी सोने और दूसरी धातुओं पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स और स्पॉट मार्केट में भी कीमती धातुओं की कीमतों में कमजोरी रही। स्पॉट गोल्ड करीब 3,956 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। अमेरिकी गोल्ड वायदा भी लगभग 3,969 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं स्पॉट सिल्वर करीब 57.35 डॉलर प्रति औंस तक गिर गई। प्लैटिनम भी कमजोर रहा, जबकि पैलेडियम में हल्की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि पूरे महीने और तिमाही के आधार पर सिल्वर, प्लैटिनम और पैलेडियम भी दबाव में बने हुए हैं।
तिमाही में भी बड़ी गिरावट की ओर बढ़ रहा है सोना
सोने के लिए यह केवल एक महीने की कमजोरी नहीं है। विश्लेषकों के अनुसार, वर्ष 2024 के बाद पहली बार सोना तिमाही आधार पर गिरावट की ओर बढ़ रहा है। यदि यही रुझान बना रहता है, तो यह जून 2013 के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट हो सकती है। यानी निवेशकों की सुरक्षित निवेश वाली धारणा पर फिलहाल ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती भारी पड़ती दिखाई दे रही है।
फेड की अगली चाल पर टिकी बाजार की नजर
सोने की कीमतों की दिशा अब काफी हद तक अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के अगले फैसले पर निर्भर करती दिखाई दे रही है। बाजार को उम्मीद है कि यदि अमेरिका में महंगाई ऊंची बनी रहती है, तो फेड इस साल ब्याज दरों में तीन बार तक बढ़ोतरी कर सकता है। सितंबर में दर बढ़ने की संभावना करीब 64% मानी जा रही है। इसी सप्ताह आने वाले एडीपी रोजगार आंकड़े और नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट निवेशकों के लिए बेहद अहम रहेंगी। इन आंकड़ों से यह संकेत मिलेगा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है और आगे ब्याज दरों की दिशा क्या हो सकती है।
डॉलर मजबूत, तेल सस्ता और भू-राजनीतिक हालात का असर
इस समय अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है। जब डॉलर मजबूत होता है, तब अन्य देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे मांग कमजोर पड़ सकती है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत तथा पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद ने तेल बाजार को राहत दी है। हालांकि भू-राजनीतिक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। यदि आने वाले दिनों में तनाव दोबारा बढ़ता है, तो सोने में सुरक्षित निवेश की मांग फिर लौट सकती है।
विशेषज्ञों की राय:
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सोने पर सबसे बड़ा दबाव महंगाई और ऊंची ब्याज दरों की आशंका से बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रख सकते हैं। ऐसी स्थिति में सोने जैसे निवेश, जो नियमित ब्याज नहीं देते, उनका आकर्षण कुछ समय के लिए कम हो सकता है। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वर्ष की दूसरी छमाही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,500 डॉलर से 4,400 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार कर सकता है।
क्या अभी और गिर सकता है सोना?
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, यदि एमसीएक्स पर सोना ₹1,40,500 के नीचे मजबूती से टिक जाता है, तो गिरावट बढ़कर ₹1,36,000 तक जा सकती है। वहीं ऊपर की ओर ₹1,45,700 से ₹1,46,000 का स्तर फिलहाल मजबूत बाधा माना जा रहा है। चांदी में भी कमजोरी जारी रहने की संभावना जताई गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर वायदा चांदी ₹2,00,000 प्रति किलोग्राम के आसपास तक फिसल सकती है, उसके बाद सुधार देखने को मिल सकता है।
निवेशक अब क्या करें?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अभी सोना खरीद लेना चाहिए? विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दबाजी में एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। यदि कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए सोने में निवेश करना चाहता है, तो वह गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड या अन्य विकल्पों में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए धीरे-धीरे निवेश कर सकता है। इससे बाजार की छोटी अवधि की तेज गिरावट और उतार-चढ़ाव का असर कम किया जा सकता है। वहीं अल्पकालिक कारोबार करने वाले निवेशकों को प्रमुख सपोर्ट और रेसिस्टेंस स्तरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
निष्कर्ष
सोने में आई मौजूदा गिरावट ने निवेशकों के सामने एक नई चुनौती और संभावित अवसर दोनों खड़े कर दिए हैं। मजबूत डॉलर, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका, महंगाई की चिंता और बदलते भू-राजनीतिक हालात फिलहाल सोने की कीमतों पर दबाव बना रहे हैं। दूसरी ओर, रिकॉर्ड ऊंचाई से आई बड़ी गिरावट ने लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमतों को पहले की तुलना में अधिक आकर्षक भी बना दिया है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि गिरावट पूरी तरह खत्म हो चुकी है। आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले, रोजगार के आंकड़े, डॉलर की चाल और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम सोने की अगली दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों के लिए सबसे बेहतर रणनीति धैर्य, चरणबद्ध निवेश और जोखिम को ध्यान में रखकर फैसला लेना हो सकती है।