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जब भी देश में कोई बड़ा आर्थिक संकट आता है, सबसे पहले नजर बैंकों पर जाती है। और हो भी क्यों न आखिर बैंक ही तो हमारी पूरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। अभी मध्य-पूर्व यानी वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष ने दुनिया भर के बाजारों को हिला रखा है। महंगाई बढ़ रही है, सप्लाई चेन टूट रही है और कच्चे तेल की कीमतें ऊपर-नीचे हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है क्या भारतीय बैंकों पर भी इसका कोई बड़ा असर पड़ेगा?रेटिंग एजेंसी Crisil ने इस सवाल का जवाब दिया है और राहत की बात यह है कि जवाब काफी हद तक सकारात्मक है।

NPA क्या है और क्यों है यह इतना महत्वपूर्ण
पहले थोड़ा समझते हैं कि NPA यानी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट होता क्या है।मान लीजिए आपने बैंक से होम लोन लिया। हर महीने EMI चुकानी है। लेकिन किसी कारण से आपने 90 दिन यानी तीन महीने तक कोई किस्त नहीं चुकाई। अब बैंक की नजर में वह लोन एक "बुरा कर्ज" बन जाता है यही NPA है।जब किसी बैंक का NPA बढ़ता है, तो उसकी कमाई कम होती है। बैंक के पास पैसे फंस जाते हैं। और इसका असर आखिर में उन आम लोगों पर भी पड़ता है जो उस बैंक में अपनी मेहनत की कमाई जमा रखते हैं।इसीलिए NPA का आंकड़ा देश की बैंकिंग सेहत का एक बड़ा पैमाना माना जाता है।
भारतीय बैंकों की मजबूत स्थिति
Crisil के अनुसार मार्च 2026 तक भारतीय बैंकों का ग्रॉस NPA घटकर लगभग 2% पर आ गया है। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। कुछ साल पहले यही आंकड़ा 10-11% के आसपास था, जब बड़े-बड़े कर्ज डूब गए थे और बैंकों की हालत खराब थी।आज तस्वीर बिल्कुल अलग है। Crisil का अनुमान है कि मार्च 2027 तक यह NPA 2.0% से 2.2% के बीच रहेगा। यानी थोड़ी बढ़त जरूर हो सकती है, लेकिन कोई बड़ा संकट नहीं आएगा।इस मजबूती की सबसे बड़ी वजह है बड़ी कंपनियों यानी कॉरपोरेट सेक्टर की बेहतर हालत। बैंकों के कुल कर्ज में इनकी हिस्सेदारी करीब 36% है। और ये कंपनियां आज पहले से कहीं कम कर्जदार हैं। उनके पास ब्याज चुकाने की क्षमता भी काफी बढ़ी है। दस साल पहले जो स्थिति थी, उसके मुकाबले आज कंपनियों की बैलेंस शीट कहीं ज्यादा मजबूत है।Crisil ने 30 सेक्टरों का एक स्ट्रेस टेस्ट किया। नतीजा यह रहा कि 23 सेक्टरों पर वेस्ट एशिया संकट का कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ एक सेक्टर सिरेमिक्स पर गंभीर दबाव देखा जा रहा है। बाकी कुछ सेक्टरों में हल्का असर हो सकता है, लेकिन वे कुल कॉरपोरेट कर्ज का 7% से भी कम हिस्सा हैं।
किन सेक्टरों में ज्यादा दबाव दिख रहा है
सबसे ज्यादा चिंता MSME यानी छोटे और मझोले कारोबारियों को लेकर है।एक छोटा कपड़ा व्यापारी या मसाले का निर्यातक जो मध्य-पूर्व के देशों को माल भेजता था युद्ध के चलते उसका कारोबार ठप हो गया। कच्चे माल की लागत बढ़ गई। पैसा अटक गया। EMI भरना मुश्किल हो गया। यही कहानी है देशभर के लाखों छोटे कारोबारियों की।Crisil का अनुमान है कि MSME सेक्टर का NPA इस साल 3.2% से बढ़कर 3.4-3.6% तक जा सकता है। यह बढ़त परेशान करने वाली जरूर है, लेकिन सरकार ने RELIEF स्कीम जैसे उपाय शुरू किए हैं। कोविड के दौर में जिस तरह क्रेडिट गारंटी योजना ने छोटे कारोबारियों को संकट से उबारा था, वैसे ही इस बार भी मदद मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक हालात और बैंकिंग पर असर
वेस्ट एशिया संकट ने तीन बड़ी चुनौतियां खड़ी की हैं ऊर्जा की कमी, कच्चे माल की बढ़ती कीमत और रुपये पर दबाव। इन सबका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है और GDP वृद्धि दर इस साल 7.6% से घटकर 7.1% रहने का अनुमान है।लेकिन RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कहा है कि बैंकिंग सिस्टम में कोई बड़ी चिंता नहीं है। बैंक क्रेडिट की रफ्तार भी अच्छी है मार्च 2026 तक कर्ज वितरण में 13.8% की बढ़त दर्ज हुई है।रिटेल लोन की बात करें तो होम लोन में NPA मात्र 1% है, जो बहुत अच्छी स्थिति है। हां, बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन में थोड़ी सावधानी जरूरी है क्योंकि घरों पर कर्ज का बोझ धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
आगे की संभावनाएं और जोखिम
आने वाला समय कुछ चुनौतियां लेकर जरूर आ सकता है। इस साल मानसून सामान्य से कम रहने की आशंका है 11 साल में पहली बार। इससे कृषि क्षेत्र में कर्ज चुकाने की दिक्कत बढ़ सकती है।इसके अलावा अगर वेस्ट एशिया संघर्ष लंबा खिंचा, तो असर ज्यादा गहरा हो सकता है। इसीलिए Crisil ने कहा है कि आने वाले महीनों में सरकार और RBI की नीतियों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर तस्वीर चिंताजनक नहीं है। भारतीय बैंक आज अपने इतिहास की सबसे मजबूत स्थिति में हैं। NPA ऐतिहासिक निचले स्तर पर है और आगे भी ज्यादा बिगड़ने की आशंका नहीं है। MSME और कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर थोड़ी नजर रखनी होगी, लेकिन सरकार और RBI दोनों सजग हैं। जब तक ये दोनों मिलकर काम करते रहेंगे, तब तक भारत की बैंकिंग व्यवस्था इस वैश्विक उथल-पुथल में भी अपनी राह बनाती रहेगी।

nitish kumar
A California-based travel writer, lover of food, oceans, and nature.