ACKO का IPO

बिना एजेंट वाली बीमा कंपनी अब शेयर बाजार में दस्तक देने को तैयार

बेंगलुरु की डिजिटल बीमा कंपनी ACKO जल्द ही शेयर बाजार में कदम रखने वाली है। कंपनी लगभग 25 करोड़ डॉलर यानी करीब 2,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसके लिए वो गोपनीय तरीके से IPO की फाइलिंग करने जा रही है और कंपनी की वैल्यूएशन 2 से 2.5 अरब डॉलर के बीच रखने का लक्ष्य है। Acko founder and CEO Varun Dua
कब और कैसे होगी फाइलिंग?
ACKO ने इस IPO के लिए तीन बड़े निवेश बैंकों को काम पर लगाया है Morgan Stanley, Kotak Securities और ICICI Securities। कंपनी जून 2026 के अंत तक SEBI के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल करने की तैयारी में है। यह IPO ताजे शेयर जारी करने और मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बेचने, दोनों का मिला-जुला रूप होगा। गोपनीय फाइलिंग का रास्ता कंपनियों को यह सुविधा देता है कि वो बिना सब कुछ सार्वजनिक किए, लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं। ACKO भी इसी रास्ते पर चल रही है।
ACKO है क्या और इसे खास क्यों माना जाता है?
दरअसल, ACKO की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बीमा बेचने के पुराने तरीके को पूरी तरह बदल देती है। जहां ICICI Lombard जैसी पारंपरिक कंपनियां एजेंटों और बिचौलियों के जरिए बीमा बेचती हैं, वहीं ACKO सीधे ग्राहक तक पहुंचती है बिना किसी बिचौलिए के। इसे Direct-to-Consumer यानी D2C मॉडल कहते हैं। इससे बीमा लेना सस्ता और आसान हो जाता है। ग्राहक अपने फोन से ही मोटर, हेल्थ या लाइफ इंश्योरेंस खरीद सकता है। ACKO के साथ PhonePe, Zomato, Oyo, redBus जैसे 50 से ज्यादा प्लेटफॉर्म जुड़े हुए हैं जो अपने यूजर्स को ACKO की बीमा पॉलिसी ऑफर करते हैं। यह "एम्बेडेड इंश्योरेंस" का एक बेहद स्मार्ट तरीका है।
कंपनी की ग्रोथ की कहानी
ACKO की स्थापना 2016 में वरुण दुआ ने की थी। वरुण इससे पहले इंश्योरेंस वितरण प्लेटफॉर्म Coverfox बना चुके थे। ACKO को 2017 में लाइसेंस मिला और 2018 में कारोबार शुरू हुआ। शुरुआत मोटर इंश्योरेंस से हुई, लेकिन मार्च 2023 में कंपनी ने हेल्थ इंश्योरेंस में भी कदम रखा और Parentlane को खरीदकर अपना हेल्थ कारोबार मजबूत किया। FY26 में कंपनी ने मोटर इंश्योरेंस में 1,186 करोड़ रुपये और हेल्थ इंश्योरेंस में 1,235 करोड़ रुपये के प्रीमियम अंडरराइट किए। यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी तेजी से आगे बढ़ रही है। घाटा कम हो रहा है, मुनाफे की राह नजदीक
FY25 में ACKO की कुल आमदनी करीब 2,837 करोड़ रुपये रही जो पिछले साल से 35 फीसदी ज्यादा है। यह ग्रोथ पूरे बीमा उद्योग की औसत ग्रोथ से कहीं ज्यादा है जो उस दौरान 10 फीसदी से भी कम रही। वहीं, कंपनी का घाटा जो FY24 में 670 करोड़ रुपये था, वो FY25 में घटकर 424 करोड़ रुपये पर आ गया। यानी घाटा करीब 37 फीसदी कम हुआ। यह संकेत है कि ACKO धीरे-धीरे मुनाफे की तरफ बढ़ रही है, भले ही अभी कुछ वक्त और लगे।
बड़े निवेशकों का भरोसा
ACKO में अब तक 58 करोड़ डॉलर से ज्यादा का निवेश आ चुका है। General Atlantic, Accel Partners, Elevation Capital, Multiples Private Equity और Canada Pension Plan Investment Board जैसे दिग्गज निवेशक इसके पीछे खड़े हैं। 2021 में जब ACKO ने 25.5 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई तो यह यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गई थी। तब इसकी वैल्यूएशन 1.1 अरब डॉलर थी। अब IPO में यह वैल्यूएशन दोगुने से भी ज्यादा होने का अनुमान है।
बाजार का हाल और चुनौतियां
अब सवाल यह है कि ACKO का IPO किस माहौल में आएगा। 2026 की शुरुआत में भारत का IPO बाजार थोड़ा सुस्त रहा है। भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर कमाई और विदेशी निवेशकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया ने बाजार पर असर डाला है। इसके अलावा ACKO को अभी मुनाफे में आना बाकी है। ICICI Lombard और Digit Insurance जैसे मजबूत प्रतिस्पर्धी पहले से बाजार में जमे हुए हैं। नियामक जांच और बड़े पैमाने पर विस्तार की जटिलताएं भी चुनौती बन सकती हैं। लेकिन ACKO की ताकत यह है कि उसका मॉडल अलग है। बिना एजेंट के बीमा बेचना, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सवारी करना और तेज ग्रोथ ये तीनों मिलकर एक दमदार कहानी बनाते हैं।
निष्कर्ष
ACKO का IPO सिर्फ एक कंपनी का शेयर बाजार में आना नहीं है, बल्कि यह भारत में डिजिटल बीमा के भविष्य की परीक्षा है। अगर ACKO सार्वजनिक बाजार में भरोसा जीत लेती है, तो यह साबित होगा कि एजेंट-मुक्त, पूरी तरह डिजिटल बीमा का मॉडल टिकाऊ और मुनाफेदार हो सकता है। रास्ता आसान नहीं है, लेकिन ACKO की रफ्तार और निवेशकों का साथ देखकर लगता है कि यह कंपनी लंबी दौड़ के लिए तैयार है।