7 महीने के निचले स्तर पर सोना-चांदी

क्या मेटल शेयरों की गिरावट अभी और बढ़ेगी?

कुछ महीने पहले तक सोना और चांदी लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे थे। निवेशकों को लग रहा था कि कीमती धातुओं की तेजी अभी लंबे समय तक जारी रहेगी। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। सिर्फ एक सप्ताह में चांदी करीब 14% टूट गई है, जबकि सोना भी सात महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसका सीधा असर Hindustan Zinc, Vedanta, NALCO और IIFL Finance जैसे शेयरों पर देखने को मिला। यह खबर सिर्फ कमोडिटी बाजार तक सीमित नहीं है। इसका असर मेटल कंपनियों, गोल्ड लोन कंपनियों, निवेशकों और आम लोगों तक पड़ सकता है। जब सोना और चांदी जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों में इतनी तेज गिरावट आती है, तो यह वैश्विक आर्थिक माहौल में बड़े बदलाव का संकेत माना जाता है। लेकिन सवाल यह है... क्या यह गिरावट यहीं रुक जाएगी या अभी और कमजोरी आ सकती है?
क्या है पूरा मामला और इसकी पृष्ठभूमि?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया, जो नवंबर 2025 के बाद पहली बार हुआ है। वहीं चांदी भी 60 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई और एक सप्ताह में करीब 14% टूट गई। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा। Hindustan Zinc, Vedanta, NALCO, Hindalco, Hindustan Copper, NMDC और IIFL Finance जैसे शेयरों में 1% से 4% तक की गिरावट दर्ज की गई। विशेष रूप से Hindustan Zinc का शेयर एक सप्ताह में लगभग 9% टूट गया, क्योंकि कंपनी की आय में चांदी का महत्वपूर्ण योगदान है।
आखिर चांदी इतनी तेजी से क्यों गिर रही है?
इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है अमेरिकी डॉलर की मजबूती। जब डॉलर मजबूत होता है, तब सोना और चांदी दूसरे देशों के खरीदारों के लिए महंगे हो जाते हैं। इससे मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है। दूसरी बड़ी वजह है अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सख्त ब्याज दर नीति। बाजार को उम्मीद है कि इस साल ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऊंची ब्याज दरें ऐसे निवेशों को आकर्षक बनाती हैं जो निश्चित रिटर्न देते हैं, जबकि सोना और चांदी पर कोई ब्याज नहीं मिलता।
डॉलर मजबूत तो सोना कमजोर क्यों?
सोने और डॉलर का संबंध अक्सर उल्टा माना जाता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड भी निवेशकों को सोने से दूर ले जाती है। इस बार भी यही देखने को मिला। मजबूत डॉलर, ऊंची बॉन्ड यील्ड और ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद ने सोने और चांदी दोनों की चमक फीकी कर दी।
मेटल शेयरों पर कितना असर पड़ा?
कीमती धातुओं और बेस मेटल्स की कीमतों में गिरावट का असर शेयर बाजार में तुरंत दिखाई दिया। ● Hindustan Zinc करीब 4% तक गिरा।
● Vedanta और NALCO में लगभग 3% की कमजोरी आई।
● Hindalco, Hindustan Copper, NMDC और अन्य मेटल शेयर भी दबाव में रहे।
● IIFL Finance और Manappuram Finance
जैसे गोल्ड लोन कारोबार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि धातुओं की कीमतें घटने से इन कंपनियों की भविष्य की कमाई पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से कमोडिटी बाजार में बना अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम खत्म हो गया है। इसके अलावा मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेड की सख्त नीति ने निवेशकों का रुख बदल दिया है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि चांदी अब काफी नीचे आ चुकी है। ऐसे में निकट भविष्य में शॉर्ट कवरिंग के कारण हल्की तेजी देखने को मिल सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों की राय फिलहाल मिली-जुली है। कुछ का मानना है कि यदि डॉलर मजबूत बना रहा और ब्याज दरें बढ़ीं, तो चांदी पर दबाव बना रह सकता है। दूसरी ओर, लंबे समय के निवेशकों के लिए तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। चांदी की मांग सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में लगातार बढ़ रही है। अगर वैश्विक औद्योगिक गतिविधियां मजबूत होती हैं, तो आने वाले वर्षों में चांदी फिर से मजबूत हो सकती है। आगे क्या है सबसे बड़ा जोखिम और अवसर?
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की अगली बैठक और डॉलर इंडेक्स पर रहेगी। अगर डॉलर और मजबूत होता है, तो सोना और चांदी पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन यदि ब्याज दरों को लेकर नरमी आती है या औद्योगिक मांग मजबूत होती है, तो कीमती धातुओं में फिर से तेजी लौट सकती है।
आम निवेशकों के लिए क्या मतलब है?
अगर आपने मेटल शेयरों में निवेश किया है, तो केवल एक सप्ताह की गिरावट देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन नए निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि कमोडिटी आधारित कंपनियों की कमाई सीधे धातुओं की कीमतों पर निर्भर करती है। सोना और चांदी में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए भी यह समय धैर्य रखने का है। एकमुश्त निवेश की बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति ज्यादा सुरक्षित मानी जा रही है।
निष्कर्ष
सोना और चांदी में आई तेज गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक बाजार का माहौल तेजी से बदल रहा है। मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद और भू-राजनीतिक तनाव कम होने से कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। लेकिन सवाल यह है... क्या यह गिरावट लंबे समय तक रहेगी? फिलहाल निकट अवधि में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। हालांकि लंबी अवधि में औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक सुधार चांदी के लिए फिर से सकारात्मक माहौल बना सकते हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए सबसे अच्छी रणनीति यही होगी कि वे जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय वैश्विक संकेतों और कंपनी के मूलभूत प्रदर्शन पर नजर रखते हुए चरणबद्ध निवेश करें।