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शेयर बाजार में हर आईपीओ निवेशकों को शानदार कमाई नहीं देता, लेकिन कुछ लिस्टिंग ऐसी होती हैं जो पहले ही दिन चर्चा का केंद्र बन जाती हैं। कुसुमगर ने भी अपने पहले कारोबारी दिन कुछ ऐसा ही किया। करीब 37% प्रीमियम पर बाजार में कदम रखने के बाद शेयर ने 10% का अपर सर्किट छू लिया और इश्यू प्राइस के मुकाबले 50% से अधिक की बढ़त दर्ज कर ली। यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन्होंने आईपीओ में निवेश किया है, क्या उन्हें मुनाफावसूली करनी चाहिए या लंबी अवधि के लिए शेयर संभालकर रखना चाहिए? वहीं जो निवेशक इस आईपीओ से चूक गए, क्या उन्हें मौजूदा स्तर पर खरीदारी करनी चाहिए या बेहतर अवसर का इंतजार करना चाहिए? बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया साफ संकेत देती है कि निवेशकों का भरोसा कंपनी के कारोबार और डिफेंस क्षेत्र से जुड़ी संभावनाओं पर मजबूत बना हुआ है। हालांकि तेजी के पीछे केवल उत्साह ही नहीं, बल्कि कुछ ऐसे जोखिम भी हैं जिन्हें नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है।
लिस्टिंग के पहले दिन ही बनाया मजबूत रिकॉर्ड
कुसुमगर का शेयर बीएसई पर ₹574 और एनएसई पर ₹569 के भाव पर सूचीबद्ध हुआ। यह ₹419 के ऊपरी प्राइस बैंड के मुकाबले लगभग 37% का प्रीमियम था। लिस्टिंग के कुछ ही समय बाद शेयर ने बीएसई पर ₹631.35 और एनएसई पर ₹625.90 का स्तर छू लिया, जहां उस पर 10% का अपर सर्किट लग गया। यानी जिन निवेशकों को आईपीओ आवंटित हुआ, उन्हें पहले ही दिन 50% से अधिक का लाभ देखने को मिला। इतनी जबरदस्त मांग क्यों रही?
कुसुमगर के ₹650.34 करोड़ के आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला। यह इश्यू कुल 128.85 गुना सब्सक्राइब हुआ, जो इस बात का संकेत है कि संस्थागत और खुदरा दोनों वर्गों में कंपनी को लेकर मजबूत भरोसा था। ग्रे मार्केट में भी लिस्टिंग से पहले लगभग ₹161 प्रति शेयर का प्रीमियम चल रहा था। इसलिए बाजार में मजबूत शुरुआत की उम्मीद पहले से ही जताई जा रही थी और वास्तविक लिस्टिंग लगभग उसी अनुमान के अनुरूप रही।
आखिर कंपनी करती क्या है?
1990 में स्थापित कुसुमगर विशेष प्रकार के इंजीनियर्ड सिंथेटिक फैब्रिक बनाती है। ये सामान्य कपड़े नहीं हैं, बल्कि ऐसे उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी कपड़े हैं जिनका इस्तेमाल एयरोस्पेस, रक्षा, ऑटोमोबाइल, औद्योगिक उपकरणों और आउटडोर उत्पादों में किया जाता है। कंपनी के उत्पाद अधिक मजबूती, घर्षण प्रतिरोध, जलरोधक क्षमता और टिकाऊपन जैसी विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं। उसके पास 1,000 से अधिक उत्पादों का पोर्टफोलियो है और गुजरात व उत्तर प्रदेश में सात विनिर्माण इकाइयों के माध्यम से पूरी उत्पादन प्रक्रिया पर उसका नियंत्रण है। यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है। रक्षा क्षेत्र में बढ़ते सरकारी खर्च और तकनीकी विनिर्माण पर जोर से इस तरह की कंपनियों के लिए दीर्घकालिक अवसर मजबूत दिखाई देते हैं।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है
तेज लिस्टिंग के बावजूद कुछ ऐसे तथ्य हैं जिन पर निवेशकों को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। पिछले तीन वर्षों में कंपनी के राजस्व, प्रति शेयर आय (ईपीएस यानी प्रत्येक शेयर पर होने वाली कमाई) और शुद्ध संपत्ति पर प्रतिफल (आरओएनडब्ल्यू यानी कंपनी अपने निवेशित पूंजी से कितना लाभ कमा रही है) में गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025 की कमाई का बड़ा हिस्सा एक बार मिले पैराशूट ऑर्डर से आया था। यदि भविष्य में ऐसे बड़े ऑर्डर लगातार नहीं मिलते, तो आय की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) था। इसका मतलब है कि आईपीओ से जुटाई गई राशि कंपनी के पास विस्तार के लिए नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी।
विशेषज्ञों की राय क्या कहती है?
स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट की वेल्थ प्रमुख शिवानी नियाती का मानना है कि कंपनी के कारोबार में प्रवेश की बाधाएं ऊंची हैं और रक्षा क्षेत्र में लंबे समय तक विकास की संभावना बनी हुई है। हालांकि उनका सुझाव है कि आईपीओ निवेशक मजबूत लिस्टिंग के बाद आंशिक मुनाफावसूली पर विचार कर सकते हैं और शेष निवेश को ₹520 के सख्त स्टॉप-लॉस के साथ बनाए रख सकते हैं। स्टॉप-लॉस का अर्थ है ऐसा पूर्व निर्धारित स्तर जहां नुकसान सीमित रखने के लिए शेयर बेच दिया जाता है। उनके अनुसार नए निवेशकों को मौजूदा ऊंचे स्तर पर जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचना चाहिए और शेयर में स्थिरता आने या कंपनी के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन का इंतजार करना चाहिए।
ब्रोकरेज क्यों दिखा रही है भरोसा?
ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने कुसुमगर पर 'खरीदें' की रेटिंग देते हुए ₹800 का लक्ष्य मूल्य तय किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के एयरोस्पेस और रक्षा फैब्रिक कारोबार में तेजी से विस्तार की पर्याप्त गुंजाइश है। दुनिया भर में बढ़ता रक्षा बजट, भारत के मुक्त व्यापार समझौते और उच्च मार्जिन वाले विशेष उत्पादों में कंपनी की मौजूदगी भविष्य में लाभप्रदता को मजबूत बना सकती है। एमके का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से 2029 के बीच कंपनी के राजस्व, परिचालन लाभ और शुद्ध लाभ में तेज वार्षिक वृद्धि देखने को मिल सकती है।
निवेशकों को अब किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
लिस्टिंग के बाद शुरुआती उत्साह अक्सर शेयर की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव लाता है। ऐसे में निवेशकों को केवल पहले दिन की तेजी देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण होगा कि आने वाली तिमाहियों में कंपनी नए रक्षा ऑर्डर कितनी तेजी से हासिल करती है, क्या उसकी आय टिकाऊ रूप से बढ़ती है और क्या मुनाफे में लगातार सुधार दिखाई देता है। यदि कंपनी इन मोर्चों पर अच्छा प्रदर्शन करती है तो वर्तमान मूल्यांकन को समर्थन मिल सकता है।
निष्कर्ष
कुसुमगर ने बाजार में शानदार शुरुआत कर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मजबूत लिस्टिंग, रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक अवसर और सकारात्मक ब्रोकरेज रिपोर्ट इसके पक्ष में दिखाई देते हैं। दूसरी ओर, कमजोर वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड, एकमुश्त ऑर्डर पर निर्भर कमाई और आईपीओ से कंपनी को नई पूंजी न मिलना ऐसे जोखिम हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिन निवेशकों को आईपीओ आवंटित हुआ है, वे आंशिक मुनाफावसूली के साथ शेष निवेश बनाए रखने पर विचार कर सकते हैं। नए निवेशकों के लिए बेहतर रणनीति यही होगी कि वे शेयर में स्थिरता और आने वाले तिमाही नतीजों का इंतजार करें, क्योंकि आगे का प्रदर्शन ही तय करेगा कि यह शुरुआती तेजी लंबे सफर में बदलती है या नहीं।