$700 अरब का आंकड़ा पार: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने फिर दिखाई ताकत

Mon Apr 20, 2026

$700 अरब के पार पहुंचा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने एक बार फिर $700 अरब के अहम पड़ाव को पार कर लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 10 अप्रैल 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व $3.83 अरब की बढ़त के साथ $700.946 अरब पर पहुंच गया।यह खबर इसलिए भी खास है क्योंकि इससे ठीक पहले, 3 अप्रैल वाले सप्ताह में भी रिजर्व में $9.06 अरब की बड़ी उछाल देखी गई थी, जिससे यह $697.12 अरब पर पहुंचा था। यानी लगातार दो हफ्तों में जबरदस्त सुधार हुआ है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती मजबूती का संकेत है।गौरतलब है कि इस साल फरवरी 2026 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने अब तक के सर्वोच्च स्तर $728.49 अरब पर पहुंचा था। यह ऑल टाइम हाई था। लेकिन उसके बाद मध्य-पूर्व में बढ़े तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के चलते कुछ हफ्तों तक गिरावट का दौर रहा। अब जो सुधार देखने को मिल रहा है, वह बताता है कि हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।


किन कारणों से बढ़ा फॉरेक्स रिजर्व

विदेशी मुद्रा भंडार में यह बढ़त किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई घटकों के मिले-जुले योगदान से आई है।सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा संपत्ति यानी Foreign Currency Assets (FCA) का रहा। इस दौरान FCA में $3.127 अरब की बढ़ोतरी हुई और यह $555.983 अरब पर आ गया। FCA फॉरेक्स रिजर्व का सबसे बड़ा और सबसे अहम हिस्सा होता है। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी दूसरी विदेशी मुद्राएं भी शामिल होती हैं, और इन मुद्राओं की कीमतों में बदलाव का असर भी इस आंकड़े पर पड़ता है।गोल्ड रिजर्व ने भी इस बढ़त में अच्छा योगदान दिया। सोने का भंडार $601 मिलियन बढ़कर $121.343 अरब हो गया। वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोने की कीमतें आमतौर पर ऊपर जाती हैं और भारत का सोने का भंडार इसका फायदा उठाता है।इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की रिजर्व पोजिशन $41 मिलियन बढ़कर $4.857 अरब हो गई। विशेष आहरण अधिकार यानी SDR भी $56 मिलियन की मामूली बढ़त के साथ $18.763 अरब पर रहे। ये दोनों योगदान भले ही छोटे हों, लेकिन ये भारत की अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय स्थिति को और पुख्ता बनाते हैं।

वैश्विक परिस्थितियों और रुपये पर असर

फरवरी के बाद मिडिल ईस्ट यानी मध्य-पूर्व में बढ़े तनाव ने पूरे एशियाई बाजार को हिला दिया था। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। रुपये पर दबाव बढ़ा और RBI को बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करना पड़ा, ताकि रुपये की कीमत में बहुत ज्यादा गिरावट न आए। इसी वजह से फॉरेक्स रिजर्व कुछ हफ्तों तक घटता रहा।लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। हाल के हफ्तों में रुपये ने अच्छी वापसी की है। जब ज्यादातर उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही थीं, तब रुपया करीब 0.5% मजबूत हुआ। मासिक आधार पर देखें तो रुपये में करीब 3% की मजबूती आई है, जबकि कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं इसी दौरान 2-3% तक कमजोर हुईं।यह अंतर दिखाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और RBI की नीतियां असरदार साबित हो रही हैं।

आगे की दिशा और अर्थव्यवस्था के लिए संकेतविदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ एक आंकड़ा नहीं होता : 

यह देश की आर्थिक सेहत का एक बड़ा पैमाना है। मजबूत फॉरेक्स रिजर्व के कई फायदे होते हैं।

पहला : आयात सुरक्षा। जब किसी देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा होती है, तो वह बिना किसी संकट के कई महीनों का आयात कर सकता है। भारत का मौजूदा रिजर्व करीब 11 महीने के आयात को कवर कर सकता है, जो एक मजबूत स्थिति मानी जाती है।

दूसरा : निवेशकों का भरोसा। जब विदेशी निवेशक देखते हैं कि भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा है, तो वे यहां निवेश करने में ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं।

तीसरा : मुद्रा स्थिरता। जितना ज्यादा रिजर्व होगा, RBI उतनी ही आसानी से जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है और रुपये को स्थिर रख सकता है।

निष्कर्ष: 

$700 अरब के पार पहुंचा फॉरेक्स रिजर्व भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह संकेत देता है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर और लचीली बनी हुई है। RBI की सतर्क नीतियों और देश की मजबूत बुनियाद ने रुपये को संभाले रखा है। आने वाले महीनों में अगर वैश्विक हालात बेहतर होते हैं, तो फॉरेक्स रिजर्व के अपने ऑल टाइम हाई की तरफ दोबारा बढ़ने की उम्मीद की जा सकती है और यह भारत की आर्थिक कहानी को और मजबूत बनाएगा।

nitish kumar
A California-based travel writer, lover of food, oceans, and nature.