₹23,467 करोड़ का मुनाफा, बोनस शेयर और ₹10 डिविडेंड 

LIC ने दिखाया दम, निवेशकों का भरोसा और मजबूत

देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बड़ा भरोसा दिया है। कंपनी ने न सिर्फ मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की, बल्कि शेयरधारकों के लिए बोनस शेयर और ₹10 प्रति शेयर डिविडेंड का भी ऐलान किया है। मार्च तिमाही के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि LIC अब केवल पारंपरिक बीमा कंपनी नहीं रही, बल्कि मुनाफे की गुणवत्ता, नए कारोबार और पूंजी मजबूती के मामले में भी लगातार खुद को बेहतर बना रही है। यही वजह है कि कंपनी के नतीजों पर बाजार और निवेशकों दोनों की नजर बनी हुई है।
23% बढ़ा तिमाही मुनाफा, आय में भी मजबूत उछाल
LIC का कंसॉलिडेटेड शुद्ध मुनाफा मार्च तिमाही में 23% बढ़कर ₹23,467 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹19,039 करोड़ था। कंपनी की कुल आय भी बढ़कर ₹2.53 लाख करोड़ हो गई, जो एक साल पहले ₹2.22 लाख करोड़ थी। यह बढ़ोतरी बीमा प्रीमियम, निवेश आय और नए कारोबार में तेजी की वजह से देखने को मिली। बीमा क्षेत्र में निवेश आय बेहद अहम मानी जाती है और इस मोर्चे पर भी LIC ने मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी की निवेश से होने वाली आय बढ़कर ₹1.09 लाख करोड़ पहुंच गई, जो पिछले साल ₹93,443 करोड़ थी। इससे साफ संकेत मिलता है कि कंपनी अपने विशाल निवेश पोर्टफोलियो से बेहतर कमाई करने में सफल रही है।
प्रीमियम कारोबार में तेजी, नए ग्राहकों से बढ़ी कमाई
तिमाही के दौरान कंपनी की नेट प्रीमियम आय 12% बढ़कर ₹1.65 लाख करोड़ रही। इसमें रिन्यूअल प्रीमियम और सिंगल प्रीमियम दोनों का बड़ा योगदान रहा। पहले साल का प्रीमियम संग्रह बढ़कर ₹13,009 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹11,103 करोड़ था। इसका मतलब है कि कंपनी लगातार नए ग्राहकों को जोड़ने में सफल रही है। वहीं सिंगल प्रीमियम संग्रह 22% बढ़कर ₹70,119 करोड़ पहुंच गया। यह दिखाता है कि बड़ी रकम वाले बीमा निवेश उत्पादों में भी ग्राहकों की रुचि बनी हुई है। रिन्यूअल प्रीमियम आय भी बढ़कर ₹82,233 करोड़ हो गई। यह आंकड़ा इस बात का संकेत देता है कि पुराने ग्राहक अब भी कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं और पॉलिसियों का नवीनीकरण जारी रख रहे हैं।
नए कारोबार से बढ़ी भविष्य की कमाई की क्षमता
LIC के नतीजों का सबसे अहम पहलू उसका “नए कारोबार से मूल्य” यानी वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस रहा। यह आंकड़ा बताता है कि कंपनी नए बीमा कारोबार से भविष्य में कितना लाभ कमा सकती है। मार्च तिमाही में कंपनी का वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस 41.63% बढ़कर ₹14,179 करोड़ पहुंच गया। वहीं पूरे साल के लिए इसका मार्जिन 21% से ऊपर रहा। यह बढ़ोतरी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से निवेशक LIC की कमाई की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे थे। अब कंपनी धीरे-धीरे अधिक लाभ देने वाले बीमा उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ा रही है। कंपनी ने बताया कि उसके व्यक्तिगत कारोबार में गैर-भागीदारी वाले उत्पादों की हिस्सेदारी 35% से अधिक हो चुकी है। ऐसे उत्पाद आमतौर पर बीमा कंपनियों के लिए ज्यादा लाभदायक माने जाते हैं।
वित्तीय मजबूती और पूंजी स्थिति में बड़ा सुधार
बीमा कंपनियों की ताकत को मापने के लिए सॉल्वेंसी अनुपात को बेहद अहम माना जाता है। यह बताता है कि कंपनी भविष्य की देनदारियों को पूरा करने में कितनी सक्षम है। LIC का सॉल्वेंसी अनुपात बढ़कर 2.35 हो गया, जो पिछले साल 2.11 था। नियामकीय जरूरतों की तुलना में यह काफी मजबूत स्तर माना जाता है। कंपनी की प्रबंधन खर्च दर में भी सुधार देखने को मिला है। हालांकि कर्मचारी खर्च और अन्य संचालन खर्च बढ़े हैं, लेकिन कंपनी अपने कुल कारोबार और लाभप्रदता को बेहतर बनाए रखने में सफल रही। मार्च 2026 तक कंपनी का प्रबंधन के तहत कुल निवेश यानी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट बढ़कर ₹57.3 लाख करोड़ पहुंच गया। इससे LIC देश की सबसे बड़ी संस्थागत निवेशक के रूप में और मजबूत हुई है।
बोनस शेयर और डिविडेंड से निवेशकों को बड़ा तोहफा
LIC ने शेयरधारकों के लिए दो बड़े ऐलान किए हैं। पहला, कंपनी ने 1:1 बोनस शेयर जारी करने का फैसला किया है। यानी निवेशकों को हर एक शेयर पर एक अतिरिक्त शेयर मिलेगा। इसके लिए 29 मई 2026 को रिकॉर्ड तिथि तय की गई है। बोनस शेयरों का आवंटन 1 जून 2026 को माना जाएगा। इसके अलावा कंपनी ने ₹10 प्रति शेयर अंतिम डिविडेंड देने की भी सिफारिश की है। इसके लिए रिकॉर्ड तिथि 25 जून 2026 तय की गई है। बोनस शेयर और डिविडेंड दोनों का ऐलान यह संकेत देता है कि कंपनी अपनी मजबूत नकदी स्थिति को लेकर आश्वस्त है और निवेशकों को उसका लाभ देना चाहती है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे कदम आमतौर पर निवेशकों का भरोसा बढ़ाते हैं और लंबे समय में शेयर की धारणा को मजबूत बनाते हैं।
कुछ चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं
हालांकि नतीजे मजबूत रहे, लेकिन कुछ संकेत ऐसे भी हैं जिन पर निवेशकों को नजर रखनी होगी। कंपनी का 13वें महीने का पर्सिस्टेंसी अनुपात घटकर 67.77% रह गया। इसका मतलब है कि पहले साल के बाद कुछ ग्राहक अपनी पॉलिसी जारी नहीं रख रहे हैं। 61वें महीने का पर्सिस्टेंसी अनुपात भी कमजोर हुआ है। बीमा कंपनियों के लिए यह आंकड़ा बेहद अहम माना जाता है क्योंकि लंबे समय तक ग्राहक जुड़े रहने से नियमित कमाई बनी रहती है। इसके अलावा कर्मचारी खर्च में तेज बढ़ोतरी भी कंपनी के लिए आगे दबाव का कारण बन सकती है। हालांकि फिलहाल मजबूत प्रीमियम वृद्धि और निवेश आय ने इस असर को काफी हद तक संतुलित किया है।
अगले वित्त वर्ष के लिए क्या है कंपनी की रणनीति?
LIC प्रबंधन ने संकेत दिया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भी कंपनी दो अंकों की आय वृद्धि बनाए रखने का प्रयास करेगी। कंपनी अब ज्यादा लाभदायक उत्पादों, बेहतर वितरण रणनीति और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है। प्रबंधन का मानना है कि अगर वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक हालात स्थिर रहते हैं तो बीमा क्षेत्र में मांग मजबूत बनी रह सकती है। CEO और MD आर. दोराईस्वामी ने कहा कि कंपनी का फोकस अब केवल कारोबार बढ़ाने पर नहीं बल्कि मुनाफे की गुणवत्ता सुधारने पर भी है। यही वजह है कि गैर-भागीदारी वाले उत्पादों और बेहतर मार्जिन वाले कारोबार पर तेजी से काम किया जा रहा है।
निष्कर्ष: LIC अब केवल सरकारी बीमा कंपनी नहीं, बल्कि मजबूत निवेश कहानी बनती दिख रही
LIC के ताजा नतीजे यह संकेत देते हैं कि कंपनी अब बदलाव के दौर से निकलकर मजबूत लाभप्रदता और बेहतर कारोबारी गुणवत्ता की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुनाफे में तेज वृद्धि, नए कारोबार से मजबूत कमाई, बढ़ता सॉल्वेंसी अनुपात, रिकॉर्ड स्तर का निवेश प्रबंधन और बोनस शेयर जैसे फैसले निवेशकों के भरोसे को मजबूत करते हैं। हालांकि पॉलिसी जारी रखने की दर और बढ़ते खर्च जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन कंपनी की रणनीति और वित्तीय मजबूती इन जोखिमों को काफी हद तक संतुलित करती दिख रही है। अगर LIC आने वाले वर्षों में इसी तरह लाभप्रदता और उत्पाद गुणवत्ता सुधारने में सफल रहती है, तो यह केवल देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी ही नहीं बल्कि लंबे समय के निवेशकों के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद निवेश कहानी भी बन सकती है।