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भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए सरकार ने एक बार फिर बड़ा दांव खेला है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹62,500 करोड़ की नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग प्रोत्साहन योजना (Mobile PLI 2.0) को मंजूरी दे दी है। इस घोषणा के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली और बाजार ने साफ संकेत दिया कि निवेशकों को इस योजना से लंबी अवधि की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह नई योजना पहले वाली PLI योजना से कितनी अलग है? क्या इसका फायदा सिर्फ कुछ चुनिंदा कंपनियों को मिलेगा या पूरा इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग इससे मजबूत होगा? और सबसे महत्वपूर्ण बात क्या यह शेयर बाजार में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की अगली बड़ी थीम बन सकती है? यही वजह है कि बाजार की नजर अब केवल मोबाइल बनाने वाली कंपनियों पर नहीं, बल्कि उन कंपनियों पर भी है जो मोबाइल के पुर्जे, डिजाइन, अनुसंधान और निर्यात से जुड़ी हैं।
आखिर सरकार की नई योजना में क्या बदला?
पहली PLI योजना का उद्देश्य भारत में स्मार्टफोन असेंबली बढ़ाना था। उस रणनीति का असर भी दिखा। भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन चुका है। वर्ष 2019-20 में देश का मोबाइल उत्पादन करीब ₹2.14 लाख करोड़ था, जो बढ़कर 2024-25 में ₹5.5 लाख करोड़ तक पहुंच गया। इसी अवधि में मोबाइल निर्यात लगभग आठ गुना बढ़कर ₹2 लाख करोड़ से अधिक हो गया। 2025 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गया। अब सरकार इसी सफलता को अगले स्तर पर ले जाना चाहती है। नई योजना मोबाइल जोड़ने तक सीमित नहीं है। अब लक्ष्य भारत में अधिक से अधिक कंपोनेंट निर्माण, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला, अनुसंधान एवं विकास और वैश्विक निर्यात क्षमता विकसित करना है।
Dixon Technologies क्यों मानी जा रही सबसे बड़ी लाभार्थी?
ब्रोकरेज IIFL के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में Dixon Technologies इस योजना की सबसे बड़ी संभावित लाभार्थी बनकर उभर सकती है। कंपनी पहले से ही स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग में मजबूत स्थिति रखती है और पिछले कुछ वर्षों में उसने निर्यात तथा स्थानीय विनिर्माण दोनों पर लगातार निवेश बढ़ाया है। हाल में व्यवसाय विस्तार से जुड़े नियामकीय अनुमोदन और बैकवर्ड इंटीग्रेशन (यानी आवश्यक पुर्जों का निर्माण स्वयं करने की रणनीति) में हुई प्रगति ने भी कंपनी की स्थिति मजबूत की है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि नई योजना का पूरा लाभ तुरंत कंपनी की आय में दिखाई नहीं देगा क्योंकि फिलहाल निर्यात आधारित प्रोत्साहन उसके कुल कारोबार का सीमित हिस्सा है।
केवल Dixon ही नहीं, इन कंपनियों को भी मिल सकता है फायदा
विश्लेषकों का मानना है कि Amber Enterprises, CG Power और Kaynes Technology जैसी कंपनियां भी नई नीति से लाभ उठा सकती हैं। CG Power वर्तमान में स्मार्टफोन असेंबली के बड़े खिलाड़ियों में शामिल है। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने लगभग 3.3 करोड़ मोबाइल तैयार किए, जिनमें करीब 50 लाख इकाइयां निर्यात की गईं। ऐसे में निर्यात आधारित प्रोत्साहन का सीधा लाभ कंपनी को मिल सकता है। Kaynes Technology ने Oppo के साथ साझेदारी के जरिए मोबाइल निर्माण कारोबार में प्रवेश किया है। यदि अंतिम दिशा-निर्देश अपेक्षा के अनुरूप रहे तो कंपनी के लिए भी नए अवसर खुल सकते हैं। Amber Enterprises के लिए भी यह योजना अहम मानी जा रही है क्योंकि कंपनी अब स्मार्टफोन कंपोनेंट निर्माण में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।
Apple सप्लाई चेन क्यों बनी सबसे बड़ा आकर्षण?
भारत से होने वाले स्मार्टफोन निर्यात में Apple की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। इसलिए Apple की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी कंपनियों को इस योजना का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि Tata Electronics जैसी गैर-सूचीबद्ध कंपनियां भी इस बदलाव से मजबूत स्थिति में आ सकती हैं। यदि Apple भारत में उत्पादन और निर्यात बढ़ाता है तो उसका लाभ पूरी घरेलू सप्लाई चेन को मिलने की संभावना है। यानी अब केवल मोबाइल असेंबली नहीं, बल्कि कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले, बैटरी, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए भी बड़ा अवसर तैयार हो सकता है।
बाजार ने क्यों दिखाई इतनी तेजी?
सरकारी मंजूरी के तुरंत बाद इलेक्ट्रॉनिक्स शेयरों में खरीदारी बढ़ गई। Dixon Technologies के शेयर में कारोबार के दौरान 7% से अधिक तेजी दर्ज हुई, जबकि Kaynes Technology में भी मजबूत उछाल देखने को मिला। बाजार का मानना है कि यह योजना केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि कंपनियों के लिए उच्च मूल्य वाले उत्पादों और बेहतर मार्जिन वाले कारोबार के नए अवसर भी तैयार करेगी। हालांकि निवेशकों ने यह भी ध्यान रखा कि विस्तृत दिशा-निर्देश अभी जारी होने बाकी हैं। इसलिए शुरुआती उत्साह के बावजूद अंतिम लाभ योजना की वास्तविक शर्तों पर निर्भर करेगा।
ब्रोकरेज की राय क्या कहती है?
IIFL के अलावा Macquarie और Jefferies भी इस क्षेत्र को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं। Macquarie ने Dixon Technologies को नई योजना का सबसे स्पष्ट लाभार्थी बताया है, जबकि Amber Enterprises को ऐसा खिलाड़ी माना है जिसकी क्षमता का बाजार ने अभी पूरी तरह आकलन नहीं किया है। Jefferies का मानना है कि पहली PLI योजना की तुलना में इस बार प्रतिस्पर्धा अधिक होगी, लेकिन अवसर भी ज्यादा व्यापक होंगे। कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि कैमरा मॉड्यूल और डिस्प्ले निर्माण जैसी गतिविधियों में पहले से निवेश कर चुकी कंपनियां अतिरिक्त लाभ उठा सकती हैं।
निवेशकों को किन जोखिमों पर भी नजर रखनी चाहिए?
हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। नई योजना की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं। प्रोत्साहन की पात्रता, निर्यात लक्ष्य, स्थानीय मूल्य संवर्धन और निवेश की शर्तें स्पष्ट होने के बाद ही वास्तविक लाभ का आकलन संभव होगा। दूसरी चुनौती यह है कि कई प्रमुख EMS कंपनियों के शेयर पहले से ऊंचे मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे हैं। यदि कंपनियां अपेक्षित गति से उत्पादन या निर्यात नहीं बढ़ा पातीं, तो निवेशकों की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या Mobile PLI 2.0 भारत को केवल मोबाइल निर्माण का केंद्र बनाएगी या वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में भी उसकी हिस्सेदारी बढ़ाएगी। यदि सरकार की योजना के अनुरूप कंपोनेंट निर्माण, अनुसंधान और घरेलू मूल्य संवर्धन तेजी से बढ़ते हैं, तो भारत केवल असेंबली हब नहीं रहेगा बल्कि उच्च तकनीक विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
निष्कर्ष
नई Mobile PLI 2.0 योजना भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए केवल एक प्रोत्साहन योजना नहीं, बल्कि पूरी उत्पादन रणनीति में बदलाव का संकेत है। Dixon Technologies, CG Power, Amber Enterprises और Kaynes Technology जैसी कंपनियां इस बदलाव की शुरुआती लाभार्थी बन सकती हैं। हालांकि निवेशकों को केवल शुरुआती उत्साह के आधार पर निर्णय लेने के बजाय योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश, कंपनियों की निवेश क्षमता, निर्यात वृद्धि और स्थानीय मूल्य संवर्धन पर नजर रखनी चाहिए। यदि ये सभी पहलू उम्मीद के मुताबिक आगे बढ़ते हैं, तो आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग भारतीय शेयर बाजार की सबसे मजबूत दीर्घकालिक निवेश थीम बन सकती है।