भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $703 अरब पार

रुपया फिसला, लेकिन देश की आर्थिक नींव मज़बूत

अगर घर में बचत अच्छी हो तो मुश्किल वक्त में काम आती है। ठीक यही बात देश के लिए भी लागू होती है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार यानी Forex Reserves इस हफ्ते $703 अरब को पार कर गया। यह खबर अच्छी है। लेकिन साथ में रुपया 14 पैसे कमज़ोर भी हुआ। तो आखिर यह सब क्या है, क्यों हुआ और इसका आम आदमी पर क्या असर पड़ता है आइए आसान भाषा में समझते हैं।
Forex Reserves यानी विदेशी मुद्रा भंडार क्या होता है?
सरल शब्दों में कहें तो Forex Reserves वह पैसा है जो भारत ने दूसरे देशों की मुद्राओं, सोने और कुछ अंतर्राष्ट्रीय संपत्तियों के रूप में जमा करके रखा है। यह RBI यानी भारतीय रिज़र्व बैंक के पास सुरक्षित रहता है। इसे ऐसे समझिए मान लीजिए आप विदेश यात्रा पर जाते हैं। आपके पास डॉलर, पाउंड या यूरो होते हैं ताकि वहां काम चल सके। उसी तरह भारत के पास भी विदेशी मुद्रा का भंडार होता है ताकि आयात का भुगतान हो सके, विदेशी कर्ज चुकाया जा सके और रुपये को स्थिर रखा जा सके। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार यह भंडार इतना बड़ा है कि भारत 11 महीने से भी ज़्यादा का आयात बिना किसी नई कमाई के कर सकता है। यह एक बड़ी ताकत है।
इस भंडार में क्या-क्या शामिल है?
Forex Reserves के मुख्य रूप से चार हिस्से होते हैं विदेशी मुद्रा संपत्तियां (Foreign Currency Assets): यह सबसे बड़ा हिस्सा है। इसमें डॉलर, यूरो, पाउंड, येन जैसी मुद्राएं शामिल हैं। अभी यह $557 अरब से ज़्यादा है। जब इन मुद्राओं की कीमत बदलती है तो इस हिस्से की वैल्यू भी बदल जाती है। सोने का भंडार (Gold Reserves): भारत के पास $122 अरब से ज़्यादा का सोना है। जब दुनिया में अनिश्चितता होती है तो सोने की कीमत बढ़ती है और भंडार की कुल वैल्यू भी ऊपर जाती है।
SDR यानी Special Drawing Rights 
यह IMF यानी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की तरफ से दिया गया एक खास क्रेडिट होता है। इसे आप एक अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा की तरह समझ सकते हैं जो ज़रूरत पड़ने पर काम आती है।
IMF में रिज़र्व पोज़िशन
यह वह राशि है जो भारत IMF से बिना किसी शर्त के निकाल सकता है।
रुपया 14 पैसे क्यों गिरा?
भंडार बढ़ा, फिर भी रुपया कमज़ोर हुआ यह सुनकर थोड़ा अजीब लगता है। लेकिन इसकी वजह समझना आसान है। जब बाज़ार में डॉलर की मांग बढ़ती है तो रुपया कमज़ोर होता है। इस बार दो मुख्य कारण रहे एक, विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाज़ार से पैसा निकाला और डॉलर खरीदे। दो, तेल कंपनियों को कच्चे तेल का भुगतान डॉलर में करना होता है, तो उन्होंने भी डॉलर खरीदे। रुपया 94.11 से गिरकर 94.25 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यानी 14 पैसे की गिरावट। RBI ने इस गिरावट को रोकने के लिए बाज़ार में डॉलर बेचे। यह RBI का हस्तक्षेप था। इससे रुपये को थोड़ी राहत मिली वरना गिरावट और ज़्यादा हो सकती थी।
सरकारी बॉन्ड की यील्ड क्यों घटी?
10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.93% पर आ गई यह 6 आधार अंक कम हुई। इसकी वजह थी ईरान के विदेश मंत्री का इस्लामाबाद दौरा और US से बातचीत की खबर। इससे भू-राजनीतिक तनाव कुछ कम होने की उम्मीद बनी। जब तनाव घटता है तो निवेशक सुरक्षित निवेश से बाहर निकलते हैं और बॉन्ड यील्ड गिरती है। आम आदमी और निवेशक के लिए इसका क्या मतलब?
यह सवाल सबसे ज़रूरी है। अगर आप आम नागरिक हैं : रुपये की गिरावट का मतलब है कि आयातित चीज़ें जैसे पेट्रोल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खाने का तेल थोड़े महंगे हो सकते हैं। लेकिन 14 पैसे की गिरावट बहुत छोटी है, इससे तुरंत कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। अगर आप निवेशक हैं : $703 अरब का भंडार यह दर्शाता है कि भारत की आर्थिक स्थिति मज़बूत है। RBI के पास संकट से लड़ने की ताकत है। बॉन्ड यील्ड में गिरावट आने वाले समय में ब्याज दरें कम होने का संकेत हो सकती है, जो शेयर बाज़ार के लिए अच्छा होता है। अगर आप विदेश पैसा भेजते या मंगाते हैं : रुपये में उतार-चढ़ाव पर नज़र रखना फायदेमंद रहेगा।
निष्कर्ष
$703 अरब का Forex Reserves भारत की आर्थिक ताकत की निशानी है। इस भंडार में विदेशी मुद्रा, सोना और अंतर्राष्ट्रीय संपत्तियां शामिल हैं जो देश को किसी भी बाहरी झटके से बचाती हैं। रुपये में 14 पैसे की गिरावट ज़रूर हुई, लेकिन RBI की सक्रियता से बड़ा नुकसान टल गया। कुल मिलाकर भारत की आर्थिक बुनियाद अभी मज़बूत है और यह आम नागरिक, निवेशक और देश तीनों के लिए राहत की बात है।