There are no items in your cart
Add More
Add More
| Item Details | Price | ||
|---|---|---|---|

कारोबार की दुनिया में कभी-कभी ऐसे सौदे होते हैं जो देखने में बड़े लगते हैं, लेकिन असल में उनकी चतुराई उनकी बनावट में छुपी होती है। भारती एयरटेल ने ऐसा ही एक सौदा किया है 28,200 करोड़ रुपये का, और वह भी बिना जेब से एक रुपया निकाले। कंपनी के बोर्ड ने एक बड़े शेयर अदला-बदली सौदे को मंजूरी दी है। इस सौदे के जरिए एयरटेल अपनी अफ्रीकी कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाएगी और साथ ही मित्तल परिवार की एयरटेल में पकड़ भी और मजबूत होगी।
पहले समझिए यह सौदा है क्या?
एयरटेल की एक अलग अफ्रीकी इकाई है जिसका नाम एयरटेल अफ्रीका है। यह कंपनी लंदन के शेयर बाजार में सूचीबद्ध है और अफ्रीका के कई देशों में मोबाइल और डिजिटल बैंकिंग का कारोबार करती है। अब तक एयरटेल की इस अफ्रीकी कंपनी में 62.73 फीसदी हिस्सेदारी थी। बाकी हिस्सेदारी अलग-अलग निवेशकों के पास थी। उन्हीं में से एक हिस्सेदार था इंडियन कॉन्टिनेंट इन्वेस्टमेंट लिमिटेड यानी आईसीआईएल। यह मित्तल परिवार की निजी निवेश कंपनी है। आईसीआईएल के पास एयरटेल अफ्रीका की 16.31 फीसदी हिस्सेदारी थी। इस सौदे में एयरटेल ने आईसीआईएल से वह पूरी 16.31 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली लेकिन नकद देकर नहीं, बल्कि अपने नए शेयर देकर।
शेयर अदला-बदली का मतलब क्या होता है?
इसे एक सरल उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपके पास एक मकान है और पड़ोसी के पास एक दुकान। दोनों की कीमत बराबर है। आप दोनों तय करते हैं कि नकद न लेकर सीधे अदला-बदली कर लेंगे आपका मकान उसे, उसकी दुकान आपको। न आपने पैसे दिए, न उसने। बिल्कुल इसी तरह एयरटेल ने आईसीआईएल को अपने नए शेयर दिए और बदले में आईसीआईएल ने एयरटेल अफ्रीका के अपने शेयर एयरटेल को दे दिए। पूरा सौदा बिना नकद के निपट गया।
सौदे की शर्तें क्या हैं?
एयरटेल ने आईसीआईएल को करीब 14.67 करोड़ नए शेयर जारी किए। इन शेयरों की कीमत 1,923 रुपये प्रति शेयर तय की गई, जो उस दिन के बाजार भाव से करीब 9.5 फीसदी ज्यादा है। इसके बदले आईसीआईएल ने एयरटेल अफ्रीका में अपनी पूरी 16.31 फीसदी हिस्सेदारी एयरटेल को सौंप दी। यह हिस्सेदारी उस दिन के बाजार भाव से करीब 11.6 फीसदी छूट पर मिली। यानी एयरटेल ने थोड़े महंगे शेयर देकर थोड़े सस्ते दाम पर अफ्रीका की हिस्सेदारी हासिल की। कुल सौदे की कीमत करीब 28,200 करोड़ रुपये या करीब 2.9 अरब डॉलर बैठती है।
इस सौदे के बाद क्या बदला? एयरटेल अफ्रीका में हिस्सेदारी: पहले 62.73 फीसदी थी, अब 79.04 फीसदी हो गई।
आईसीआईएल की एयरटेल में हिस्सेदारी: पहले 0.95 फीसदी थी, अब 3.25 फीसदी हो जाएगी।
प्रमोटरों की कुल हिस्सेदारी: एयरटेल में प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी 48.87 फीसदी से बढ़कर 50.07 फीसदी हो जाएगी। यानी पहली बार प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी 50 फीसदी के पार जाएगी।
मित्तल परिवार को इससे क्या मिला?
यह सवाल जरूरी है। एयरटेल में दो बड़े प्रमोटर हैं मित्तल परिवार और सिंगापुर की दूरसंचार कंपनी सिंगटेल। अब तक सिंगटेल की हिस्सेदारी मित्तल परिवार से थोड़ी ज्यादा थी। इस सौदे के बाद मित्तल परिवार की हिस्सेदारी 23.2 फीसदी और सिंगटेल की 26.8 फीसदी हो जाएगी। यह अंतर थोड़ा कम होगा। इसके अलावा ज्यादा हिस्सेदारी का मतलब है कि भविष्य में किसी भी रणनीतिक फैसले में मित्तल परिवार की आवाज और वजनदार होगी।
एयरटेल के मौजूदा निवेशकों का क्या होगा?
जब कोई कंपनी नए शेयर जारी करती है, तो मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी थोड़ी कम हो जाती है। इसे घुलाव कहते हैं। इस सौदे में मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी करीब 2.4 फीसदी कम होगी। लेकिन कंपनी का कहना है कि इससे प्रति शेयर आमदनी बढ़ेगी क्योंकि एयरटेल अफ्रीका से जो अतिरिक्त मुनाफा आएगा, वह इस हिस्सेदारी कमी से कहीं ज्यादा होगा। इसलिए लंबे समय में यह निवेशकों के हित में ही है।
अफ्रीका में एयरटेल की कहानी क्यों अहम है?
सुनील भारती मित्तल ने 15 साल पहले अफ्रीका में कदम रखा था। तब कई लोगों ने इसे जोखिम भरा कदम माना था। लेकिन आज वह फैसला सही साबित हो रहा है। अफ्रीका में करीब 140 करोड़ लोग हैं। इनमें से बड़ी तादाद युवा है। स्मार्टफोन की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। डिजिटल लेनदेन और मोबाइल बैंकिंग का बाजार अभी शुरुआती दौर में है यानी आगे बढ़ने की बहुत गुंजाइश है। मित्तल का कहना है कि जो बदलाव भारत ने पिछले 10 साल में देखे, वही बदलाव अफ्रीका अगले 10 साल में देखेगा। और उस बदलाव का फायदा उठाने के लिए एयरटेल को अफ्रीका में ज्यादा से ज्यादा हिस्सेदारी चाहिए। मित्तल ने यह भी कहा है कि लंबे समय में एयरटेल की कोशिश होगी कि एयरटेल अफ्रीका में हिस्सेदारी 90 फीसदी तक पहुंचे, जो ब्रिटिश नियमों के तहत अनुमत सीमा है।
बाजार ने इसे कैसे लिया?
सौदे की घोषणा के बाद एयरटेल के शेयरों में करीब 1.84 फीसदी की तेजी आई। बाजार के जानकारों ने इसे सकारात्मक कदम माना। कारण साफ है अगर कंपनी नकद देकर यह हिस्सेदारी खरीदती, तो उसके 28,000 करोड़ रुपये एक झटके में निकल जाते। उससे कर्ज बढ़ता या नकदी भंडार घटता। लेकिन शेयर अदला-बदली से न कर्ज बढ़ा, न नकदी घटी। कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रही।
निष्कर्ष
यह सौदा सिर्फ एक कागजी लेनदेन नहीं है। यह एयरटेल की उस बड़ी सोच का हिस्सा है जिसमें भारत और अफ्रीका दोनों को एक साथ विकसित किया जाए। एक तरफ अफ्रीका में पकड़ मजबूत हुई, दूसरी तरफ भारत में मित्तल परिवार का रसूख बढ़ा। और यह सब बिना एक रुपया खर्च किए हुआ। कारोबारी समझदारी इसी को कहते हैं।